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वीजीएम सिक्योरिटी एप से पकड़ा जाएगा मोबाइल चोर, महिला सुरक्षा के लिए विशेष फीचर

Posted On: 21 Nov, 2019 Hindi News में

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21वीं सदी में आज हर हाथ में स्‍मार्टफोन है। छोटा सा ये डि‍वाइस आज इंसान की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। सुबह सोकर उठने से रात को सोने तक मोबाइल फोन ही वो पहली और आखि‍री चीज है जि‍से व्‍यक्‍ति‍ सबसे पहले और सबसे आखि‍री में अपने हाथ में लेता है। ये डि‍वाइस ही आज व्‍यक्‍ति‍ का सबसे बड़ा डाटा सेवर बन चुका है। ऐसे में यदि मोबाइल चोरी हो जाए या कहीं गिर जाए है तो व्‍यक्‍ति‍ को बड़ी भारी असुवि‍धा का सामना करना पड़ता है।

 

 

इस भारी परेशानी को समझते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय सेंटर फार इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप के एक होनहार ने ऐसा ऐप ईजाद किया है, जिससे आप स्वयं अपने मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर सकते हैं और उसे चोरी करने वाले की ना सिर्फ फोटो खींच सकते हैं बल्‍कि‍ उसकी वीडि‍यो भी बना सकते हैं। आखिर कैसे वर्क करता है ये एप और इसमें क्या क्या खासियत है।

 

 

इस ऐप को बनाने वाले चंदौली जि‍ले के युवा मृत्‍युंजय सिंह ने बताया कि स्कूल के दिनों में वह बैकबेंचर थे। पढ़ाई-लि‍खाई और गणि‍त-वि‍ज्ञान वि‍षयों में उनका मन कभी नहीं लगा। कभी सोचा नहीं था कि ऐसा कुछ करूंगा। पिता जी की इच्छा थी कि कुछ अलग हट के करना। यही वजह रही कि‍ मेरी तकदीर मुझे एथिकल हैकर बनने की राह पर लेकर चल पड़ी। मैंने 13 साल तक अकेले मेहनत करते हुए एंटी मोबाइल थेप्‍ट और वि‍मेन प्रोटेक्‍शन ऐप तैयार कि‍या है, जो आज गूगल प्‍ले स्‍टोर पर VGM Security–Anti Theft & Woman Safety के नाम से उपलब्ध है।

 

 

मृत्युंजय इस समय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय सेंटर फार इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप (आइआइटी) से जुड़े हैं। यहांं उन्होंने एक ऐसा एप तैयार किया है जो आप को अचंभित कर राहत की सांस दे सकता है। अगर आपका फोन चोरी हो जाता है तो इस ऐप के आईडी पासवर्ड के जरि‍ये उसको लोकेट कि‍या जा सकता है।

 

 

यह एक ऐसा सिक्योरिटी एप है जो आपके फोन में एक बार इंस्‍टॉल होने के बाद अनइंस्‍टॉल नहीं होता है। इसे एक सुपर यूजर ही अनइंस्‍टॉल कर सकता है। मृत्युंजय ने बताया कि चोरी करने के बाद चोर सबसे पहले आपके फोन को स्‍वि‍च ऑफ कर देते हैं। सि‍म नि‍काल देते हैं और फोन को फॉर्मेट कर देते हैं। आप पुलि‍स के पास जाते हैं तो एफआईआर तो दर्ज हो जाती है मगर फोन मि‍लेगा या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। गूगल के आंकड़ों के अनुसार केवल दो प्रति‍शत फोन ही रि‍कवर हो पाते हैं, लेकिन इस एप से अब ऐसे फोन को रिकवर करना आसान हो गया है।

 

 

https://youtu.be/MNH6wDqqbvM

 

 

प्ले स्टोर पर उपलब्ध इस ऐप को बस इंस्‍टॉल करना है, रजि‍स्‍ट्रेशन करना है आपको आईडी और पासवर्ड मि‍लेगा। फोन में जाकर सारे सि‍स्‍टम को अनेबल कर लेना है। अगर फोन चोरी हो गया तो वेबसाइट पर लॉगइन करना है और आप अपने डैशबोर्ड में चले जाएंगे जहां आपको पूरा कमांड मि‍लेगा। आप यहां क्‍लि‍क करेंगे तो आपको लोकेशन मि‍ल जाएगा, चोर का फोटो ले सकते हैं, उसका वीडि‍यो बना सकते हैं। फोन को लॉक कर सकते हैं फोन को फॉर्मेट कर सकते हैं। फोन के सारे डेटा को रि‍कवर कर सकते हैं। डेटा को डि‍लीट कर सकते हैं। फोन का एक्‍जेक्‍ट लोकेशन वेबसाइट के जरि‍ये जान सकते हैं।

 

 

मृत्युंजय ने बताया कि इसके अलावा यह एप वि‍मेन प्रोटेक्‍शन में भी कारगर है। यदि विकट परिस्थिति में महिला फोन को शेक करती है, या तीन सेकेंड में पावर बटन को तीन बार दबाती है तो उसका मोबाइल थेप्‍ट मोड में चला जाएगा और उसके दि‍ये गये नंबरों को ये मैसेज भी जाएगा कि‍ मैं परेशानी में हूं मेरी मदद करें।

 

 

मृत्युंजय ने बताया कि से चोरी करने वाला सबसे पहले मोबाइल को ऑफ करता है। इस एप के इंस्टाल होने के बाद एंड्रायड सेट के पावर बटन काम नहीं करेंगे। बैटरी इनबिल्ट होने से चोरी करने वाला चाहकर भी मोबाइल ऑफ नहीं कर पाएगा। मोबाइल स्विच ऑफ होने से पहले ही यूजर एप के वेबसाइट पर जाकर अपने मोबाइल का रियल टाइम लोकेशन देख सकता है। इसके अलावा वेबसाइट के माध्यम से यूजर अपने मोबाइल की गैलरी से फोटो, वीडियो, डाक्यूमेंट आदि एक्सेस व डाउनलोड भी कर सकता है। इतना ही नहीं, वेबसाइट के माध्यम से ही मोबाइल फोन को ऑन व ऑफ भी किया जा सकता है।

 

 

बीएचयू के इस होनहार के एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मोबाइल चोरी होने पर वेबसाइट के माध्यम से यूजर अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर चोर की तस्वीर ले सकेगा और वीडियो भी बना सकेगा। वहीं वेबसाइट पर ही ऑडियो सेटिंग का प्रयोग कर आस-पास की आवाज भी सुनी जा सकेगी, जब तक मोबाइल की बैटरी चार्ज है चोर उसे ऑफ नहीं कर पाएगा। डिस्चार्ज होने पर स्वत: मोबाइल बंद हो जाएगी। इस बीच चोर की लोकेशन नहीं ले पाने पर भी घबराने की जरूरत नहीं। जाहिर है चोर इसे लेकर मोबाइल शॉप पर जाएगा और उसे फार्मेट कराएगा। मगर इनबिल्ट हो चुका यह एप मोबाइल से अनइंस्टाल नहीं होगा। मोबाइल ऑन होते ही रियल टाइम लोकेशन यूजर के ई-मेल पर पहुंच जाएगा। इतना ही नहीं मोबाइल में दूसरा सिम लगाते ही उसका नंबर भी एप के जरिए यूजर तक पहुंच जाएगा।

 

 

 

मृत्युंजय ने बताया कि ‘कक्षा 9 में मैंने अपना खुद का एक गेम डेवलप किया था उसके बाद ही पिता जी ने मुझपर भरोसा दिखाया। मैंने आधी हैकिंग की टेक्निक इंटरनेट से सीखी। उसके बाद छत्तीसगढ़ के रायपुर में मैंने साइबर सिक्योरिटी और इथिकल हैकिंग की पढ़ाई की। उसके बाद रायपुर, भिलाई, दुर्ग, जगदलपुर, बीजपुर पुलिस कंट्रोल रूम पर साइबर सिक्योरिटी के लिए मैंने कार्य किया।

 

 

 

नोट : ये लेखक के निजी विचार हैं। इनसे संस्‍थान का कोई लेना-देना नहीं है।

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