blogid : 5086 postid : 714167

नए समझ सोच को पिरोना ही है

Posted On: 8 Mar, 2014 Others में

नए कदमहार्दिक स्वागत

dalveermarwah

40 Posts

49 Comments

यह तो होना ही है ।
जाते समय को खोना ही है ॥
नया अध्याय नये पन्ने पर ।
नए समझ सोच को पिरोना ही है ॥

कई सादिया देखी परखी ।
नयी ऋतू को जीवन संजोना ही है ॥
नए फूलों को खिलना ही है ।
नयी आशा कि पौध को बोना ही है॥

हरे भरे पेड को लहलहराते देखा है ।
पतझड में उसे पत्ते खोना ही है ॥
नए सुबह कि रोशनी के लिए ।
रात को पुराना होना ही है ॥

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग