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पहली प्रेम कहानी

Posted On: 7 Mar, 2011 Others में

Dating Tipsजिन्दगी का महकता गुलदस्ता

राहुल

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बस इक झिझक है यही हाल ए दिल सुनाने में

तेरा भी जिक्र आयेगा इस फसाने में.


my-first-loveपहले प्यार हर किसी के लिए बहुत ही यादगार होता है. पहला प्यार कहने को तो कच्ची उम्र का होता है लेकिन सच कहें तो असली प्यार वही होता है. उस प्यार में सच्चाई होती है, निश्छल होता है और सबसे अहम वह दैहिक प्रेम ना होकर प्रेम का असली अर्थ बताता है. पहला प्यार तो हमेशा मां करती है लेकिन अगर हम बात लड़के और लड़की के बीच के प्रेम की करें तो अक्सर प्यार या तो स्कूल की किसी लड़की से होता है या फिर कॉलोनी में रहनी वाली किसी बाला से.


मेरे जीवन में भी पहला प्यार विद्यालय की ही देन से आया. छठी कक्षा में नए-नए गए थे. हमेशा से ही मेरे दोस्तों का एक खास ग्रुप था. हमारे ग्रुप में ही एक लड़की थी अंजलि. क्लास में हमेशा सबसे आगे. कभी कभी उसे ईष्या होती थी (क्यूंकि सब सब्जेक्टों में उससे आगे होता था लेकिन गणित और कला में वह आगे निकल जाती थी). पर ज्यादातर जब भी उसकी तरफ देखता था, दिल में कुछ कुछ होता था. तब बहुत छोटे थे. हालांकि छठी से सातवीं कक्षा तक जाते-जाते समझ में आ गया कि कुछ तो खास है जो हमेशा निगाहें उसी लड़की को ढ़ूंढ़ती हैं. वह भी कभी-कभी मजाक करती थी लेकिन दोस्ती में तो इतना चलता ही था पर यह दिल उस छोटे से मजाक को आज भी याद कर मुस्करा देता है.


my-loveकभी उससे यह कहने की हिम्मत तो नहीं हुई कि मुझे उससे प्यार है क्यूंकि सातवीं के बाद ही उसने दूसरे विद्यालय में चली गई. और आठवीं कक्षा में हमारे प्रेम के रोग को निशा नामक दवाई मिल गई.


खैर आज भी उस पहले प्यार की दस्तक दिल और दिमाग में है. अजंलि का हंसना, उसकी बातें हर चीज दिल में है बस नहीं है तो वह. पता नहीं क्यू पहले प्यार की छाप दिल पर सभी प्यार से गहरी होती है? जवाब हो तो कोई बताए.

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