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Kalpana Chawla: इन्होंने 21वीं सदी में महिलाओं की सोच को बदला

Posted On: 1 Jul, 2013 Others में

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21वीं सदी में भारत की महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कई सालों चली सामाजिक जकड़न से बाहर निकलना. कुछ महिलाएं तो समाज की बेड़ियों को तोड़कर आजाद हो गईं लेकिन कुछ महिलाएं अभी भी ऐसा करने से डर रही थीं. फिर दौर आया कल्पना चावला का जिसने हर तरह की सीमाओं से आगे निकलते हुए अंतरिक्ष पर पहुंचकर न केवल देश का नाम रौशन किया बल्कि लाखों करोड़ों महिलाओं की प्रेरणा बनीं. आज भारतीयों खासकर महिलाओं को कल्पना चावला (Kalpana Chawala) पर फ़क्र है और वे उनकी सफलता के किस्से सुनाते नहीं थकतीं.


kalpana chawlaकल्पना चावला का जीवन (Kalpana Chawala Life)

भारतीय मूल की अंतरिक्ष वैज्ञानिक कल्पना चावला (Kalpana Chawala) का जन्म 1 जुलाई, 1961 को हरियाणा के करनाल कस्बे में हुआ था. कल्पना चावला (Kalpana Chawala) अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय मूल की महिला थीं. कल्पना के पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संज्योती था. वह अपने परिवार के चार भाई बहनों मे सबसे छोटी थीं.


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कल्पना चावला की शिक्षा (Kalpana Chawala Education)

कल्पना चावला (Kalpana Chawala) ने करनाल के टैगोर स्कूल से स्नातक और चंडीगढ़ से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की थी. इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए टेक्सास विश्वविद्यालय गईं जहां से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम. ए. किया. 1988 से ही कल्पना चावला ने नासा के एम्स रिसर्च सेंटर में काम करना शुरू किया. 1995 में उनका चयन बतौर अंतरिक्ष-यात्री किया गया. उन्होंने फ़्रांसीसी व्यक्ति जीन पियरे से शादी की थी.


पहली अंतरिक्ष यात्रा (Kalpana Chawla Astronaut)

कल्पना चावला (Kalpana Chawala) की पहली अंतरिक्ष यात्रा एस. टी. एस.-87 कोलंबिया स्पेस शटल से संपन्न हुई. यह यात्रा इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से लेकर 5 दिसंबर, 1997 तक रही. कल्पना चावला की दूसरी और अंतिम उड़ान 16 जनवरी, 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल से ही आरंभ हुई. यह 16 दिन का मिशन था. इस मिशन पर उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लगभग 80 परीक्षण और प्रयोग किए. वापसी के समय 1 फरवरी, 2003 को शटल दुर्घटना ग्रस्त हो गया तथा कल्पना समेत 6 अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई.


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कल्पना चावला एक जज्बा

कल्पना चावला (Kalpana Chawala) आज अमर हो चुकी हैं. मरकर भी वह आज हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा का काम कर रही हैं. महिला सशक्तिकरण की राह में कल्पना चावला ने नई कहानी लिखी है. आज उनसे प्रेरित होकर कई लड़कियां अपने सपनों को नई उड़ान देंगी.


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