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अमरीश पुरी: खलनायक नहीं नायक

Posted On: 22 Jun, 2012 Others में

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amrish puriपर्दे पर किरदारों को जीने वाले कलाकारों की अपनी भी एक पर्सनल लाइफ होती है जहां वह रील लाइफ से अलग एक जिंदगी जीते हैं. पर्दे की जिंदगी असल जिंदगी से बिलकुल अलग होती है. पर्दे की दुनिया में अकसर खलनायक दिखने वाले खिलाड़ी असल जिंदगी में किसी नायक से कम नहीं होते और इस बात के एक आदर्श उदाहरण हैं अमरीश पुरी. आज अमरीश पुरी की जयंती है.


पर्दे पर अमरीश पुरी को “गब्बर सिंह” (अमजद खान) के बाद दूसरा सबसे प्रसिद्ध और कामयाब विलेन माना जाता था. अमरीश पुरी के अंदर ऐसी अद्भुत क्षमता थी कि वह जिस रोल को करते थे वह सार्थक हो उठता था. अगर आपने उन्हें  मिस्टर इंडिया के मोगैंबो के रोल में देख कर उनसे नफरत की थी तो उन्होंने ही “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” में सिमरन का पिता बन सबके दिल को छू लिया था. अमरीश पुरी हर किरदार में फिट होने वाले एक आदर्श अभिनेता थे. एक पिता, दोस्त और विलेन तीनों ही किरदार पर उनकी पकड़ उन्हें एक महान कलाकार बनाती थी. हिंदी सिनेमा इस महान अभिनेता के बिना शायद अधूरी ही रहती. यूं तो अमरीश पुरी की पूरी जिंदगी ही एक कहानी है पर चलिए उनके जीवन के कुछ अंश पर एक नजर डालें.


अमरीश पुरी(Amrish Puri) का जन्म 22 जून, 1932 को पंजाब में हुआ. शिमला के बी एम कॉलेज(B.M. College) से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा. शुरुआत में वह रंगमंच से जुड़े और बाद में फिल्मों का रुख किया. रंगमंच से उनको बहुत लगाव था. एक समय ऐसा था जब अटल बिहारी वाजपेयी और स्व. इंदिरा गांधी जैसी हस्तियां उनके नाटकों को देखा करती थीं.


अमरीश पुरी(Amrish Puri) ने 1960  के दशक में रंगमंच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने सत्यदेव दुबे(Satyadev Dubey) और गिरीश कर्नाड(Girish Karnad) के लिखे नाटकों में प्रस्तुतियां दीं. रंगमंच पर बेहतर प्रस्तुति के लिए उन्हें 1979 में संगीत नाटक अकादमी(Sangeet Natak Akademi Award) की तरफ से पुरस्कार दिया गया, जो उनके अभिनय कॅरियर का पहला बड़ा पुरस्कार था.


अमरीश पुरी(Amrish Puri) ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत 1971 की ‘प्रेम पुजारी’ से की. पुरी का सफर 1980 के दशक में यादगार साबित हुआ. इस पूरे दशक में उन्होंने बतौर खलनायक कई बड़ी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी. 1987 में शेखर कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’(Movie : Mister India) में मोगैंबो(Mogambo) की भूमिका के जरिए वे सभी के जेहन में छा गए. 1990 के दशक में उन्होंने ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’(Hindi Movie: Dilwale Dulhaniya Le Jayenge), ‘घायल’ और ‘विरासत’ में अपनी सकारात्मक भूमिका के जरिए सभी का दिल जीता.


अमरीश पुरी(Amrish Puri) ने हिंदी के अलावा कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों तथा हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया. उन्होंने अपने पूरे कॅरियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया.


पर्दे पर अकसर निगेटिव रोल करने वाले अमरीश पुरी व्यक्तिगत जीवन में धार्मिक और दयालु व्यक्ति थे. 12 जनवरी, 2005 को अमरीश पुरी का निधन हो गया. आज अमरीश पुरी इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी यादें आज भी फिल्मों के माध्यम से हमारे दिल में बसी हैं.


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