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ईसाइयों का पवित्र पर्व क्रिसमस

Posted On: 24 Dec, 2013 Others में

Special Daysव्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

महत्वपूर्ण दिवस

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भारत देश की खासियत है कि यहां हर दिन उत्सव का माहौल रहता है. विभिन्नता में एकता के लिए हमारे देश में हर धर्म और उससे संबंधित हर पर्व को बड़े ही धूमधाम के साथ संपन्न किया जाता है. हर साल 25 दिसंबर को विश्वभर में मनाया जाने वाल ‘क्रिसमस’ पर्व ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है. यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसे दुनियाभर में पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है.


christmas 1सदियों से क्रिसमस त्यौहार लोगों को खुशियां बांटता और प्रेम और सौहार्द की मिसाल कायम करता रहा है. यह त्यौहार हमारे सामाजिक परिवेश का प्रतिबिंब भी है, जो विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारे को मजबूती देता आया है.


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क्रिसमस भगवान ईसा मसीह (जिन्हें यीशु के नाम से भी पुकारा जाता है) के जन्मदिवस के रुप में मनाया जाता है. ‘क्रिसमस’ शब्द ‘क्राइस्ट्स और मास’ दो शब्दों के मेल से बना है, जो मध्य काल के अंग्रेजी शब्द ‘क्रिस्टेमसे’ और पुरानी अंग्रेजी शब्द ‘क्रिस्टेसमैसे’ से नकल किया गया है. 1038 ई. से इसे ‘क्रिसमस’ कहा जाने लगा. इसमें ‘क्रिस’ का अर्थ ईसा मसीह और ‘मस’ का अर्थ ईसाइयों का प्रार्थनामय समूह या ‘मास’ है.


ईसा मसीह ने मानव के रूप में जन्म लेने के लिए किसी संपन्न व्यक्ति का घर नहीं चुना. उन्होंने एक गरीब व्यक्ति के घर की गोशाला में घास पर जन्म लिया. दरअसल, वे गरीब, भोले-भाले और शोषित व पीड़ित लोगों का उद्धार करने आये थे. इसीलिए उन्होंने जन्म से ही ऐसे लोगों के बीच अपना स्थान चुना. यह बहुत बड़ा संदेश था.


क्रिसमस ट्री

क्रिसमस के मौके पर क्रिसमस ट्री का बहुत ही ज्यादा महत्व है. क्रिसमस ट्री एक तरह का पौधा होता है जिस पर क्रिसमस के दिन सजावट की जाती है. मान्यता है कि इस प्रथा की शुरुआत सबसे पहले मिस्र, चीन के लोगों ने की थी. शुरुआत में यूरोप में भी लोग सदाबहार पेड़ों से घरों को सजाते थे. उनका विश्वास था कि इन पौधों को घरों में सजाने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं. ‍जीसस को मानने वाले लोग इसे ईश्वर के साथ अनंत जीवन के प्रतीक के रूप में सजाते हैं. जिसके बाद से यह परंपरा लगातार चली आ रही है.


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सैंटा क्लॉज

क्रिसमस का मौका हो और सैंटा क्लॉज की बात न हो यह हो ही नहीं सकता. यह दिन बच्चों के ढ़ेर सारी खुशियां लेकर आती है. पौराणिक मान्यता है कि सैंटा क्लॉज बच्चों के लिए, खिलौने, कुकी, केक, पाई, बिस्कुट, केंडी तैयार करवाते हैं. इसके बाद सैंटा क्लॉज गिफ्ट्स को एक बड़ी सी झोली में भरकर वो क्रिसमस के पहले की रात यानी 24 दिसंबर को रेनडियर वाले स्लेज पर बैठकर बच्चों को उपहार देने जाते हैं. लाल-सफेद कपड़ों में बड़ी-सी श्वेत दाढ़ी और बालों वाले, कंधे पर गिफ्ट्स से भरा बड़ा-सा बैग लटकाए, हाथों में क्रिसमस बेल लिए सैंटा क्लॉज बच्चों मिलने आते हैं और उन्हें गिफ्ट देते हैं.


गिरिजाघरों में धूम

क्रिसमस के मौके पर विश्वभर के गिरिजाघर को खूब सजाया जाता है. भारत में कुछ बड़े चर्चों मे सेंट जोसफ कैथेड्रिल, और आंध्र प्रदेश का मेढक चर्च, सेंट कै‍थेड्रल, चर्च ऑफ़ सेंट फ्रांसिस ऑफ़ आसीसि और गोवा का बैसिलिका व बोर्न जीसस, सेंट जांस चर्च इन विल्‍डरनेस और हिमाचल में क्राइस्‍ट चर्च, सांता क्‍लाज बैसिलिका चर्च, और केरल का सेंट फ्रासिस चर्च, होली क्राइस्‍ट चर्च में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.


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