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दलाई लामा : बौद्ध धर्म के 14वें महागुरू : Tibetan celebrate the Dalai Lama's 76 th birthday

Posted On: 6 Jul, 2011 Others में

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बौद्ध धर्म दुनिया के धर्मों का चौथा सबसे बड़ा धर्म है जिसके 375 लाख अनुयायी है. बौद्ध धर्म के धर्मगुरु को दलाई लामा कहा जाता है. आज बौद्ध धर्म के 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो (Tenzin Gyatso) का जन्मदिन है. तेनजिन ग्यात्सो (Tenzin Gyatso) तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं . दलाई लामा (Dalai Lama) का जन्म छह जुलाई, 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के तक्तेसेर (Taktser) टोले में हुआ था. उन्हें मात्र दो साल की उम्र में 13वें दलाई लामा थुबटेन ज्ञायात्सो (13th Dalai Lama, Thubten Gyatso.) का अवतार बताया गया था. छह साल की उम्र में ही मठ के अंदर उनको शिक्षा दी जाने लगी. अपने अध्ययन काल के दौरान से ही वह बहुत कर्मठ और समझदार व्यक्तित्व के स्वामी थे.


Tenzin_Gyatzo_foto_1साल 1949 में तिब्बत (Tibet) पर चीन(China) के हमले के बाद दलाई लामा से कहा गया कि वह पूर्ण राजनीतिक सत्ता अपने हाथ में ले लें और उन्हें दलाई लामा का पद दे दिया गया. 1954 में वह चीनी नेताओं से शांति वार्ता करने के लिए बीजिंग (Beijing) भी गए लेकिन सम्मेलन असफल ही रहा.

और अंत में 1959 में चीन के आक्रमण के बाद से वह उत्तर भारत के धर्मशाला (Dharamsala, Northern India) में रह रहे हैं. तिब्बत पर चीन के साम्राज्य के कारण वहां अब बौद्ध भिक्षुओं का रहना बहुत मुश्किल हो गया है पर फिर भी दलाई लामा ने हमेशा शांति का रास्ता ही अपनाने पर जोर दिया है.


Dalia Lama and John Paul1963 में दलाई लामा ने तिब्बत के लिए एक लोकतांत्रिक संविधान (Democratic Constitution) का प्रारूप प्रस्तुत किया और उसके बाद उसमें कुछ बदलाव कर चीन सरकार को पेश भी किए पर चीन सरकार की तरफ से कभी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. सितंबर 1987 में दलाई लामा ने तिब्बत की खराब होती स्थिति का शांतिपूर्ण हल तलाशने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए पांच सूत्रीय शांति योजना (Five Point Peace Plan) प्रस्तुत की. उन्होंने यह विचार रखा कि तिब्बत को ‘एक अभयारण्य’ एशिया के हृदय स्थल में स्थित एक शांति क्षेत्र में बदला जा सकता है जहां सभी सचेतन प्राणी शांति से रह सकें और जहां पर्यावरण की रक्षा की जाए. लेकिन चीन परम पावन दलाई लामा द्वारा रखे गए विभिन्न शांति प्रस्तावों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया देने में नाकाम रहा.


पांच सूत्रीय शांति योजना (Five Point Peace Plan)


21 सितंबर, 1987 को अमेरिकी कांग्रेस (United States Congress in Washington, D.C) के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए दलाई लामा ने पांच बिन्दुओं वाली निम्न शांति योजना रखीः


1. समूचे तिब्बत को शांति क्षेत्र में परिवर्तित किया जाए.

2. चीन उस जनसंख्या स्थानान्तरण नीति का परित्याग करे जिसके द्वारा तिब्बती लोगों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है.

3. तिब्बती लोगों के बुनियादी मानवाधिकार और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए.

4. तिब्बत के प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण व पुनरूद्धार किया जाए और तिब्बत को नाभिकीय हथियारों के निर्माण व नाभिकीय कचरे के निस्तारण स्थल के रूप में उपयोग करने की चीन की नीति पर रोक लगे.

5. तिब्बत की भविष्य की स्थिति और तिब्बत व चीनी लोगों के संबंधों के बारे में गंभीर बातचीत शुरू की जाए.


दलाई लामा की इस कोशिश को सबने सराहा. चीन और तिब्बत के बीच एक शांतिदूत की भूमिका निभाने के कारण उन्हें साल 1989 में शांति का नोबल पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दिया गया. इस समय तक दलाई लामा की लोकप्रियता दुनिया भर में शिखर तक पहुंच गई. ईसाइयों के धर्म गुरू पोप के बाद लोग अब दलाई लामा को भी सम्मान और श्रद्धा की दृष्टि से देखने लगे. दलाई लामा ने दुनिया भर में सफर करके अपने वचनों और शिक्षा को जगह जगह फैलाया और शांति बनाने पर जोर दिया.


अपने आप को एक आम धार्मिक बौद्ध भिक्षु मानने वाले दलाई लामा हमेशा ही शांति, पर्यावरण की रक्षा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हैं. भारत में भी दलाई लामा के कई अनुयायी हैं और वह इस बात के लिए हमेशा ही भारत और उसके नागरिकों का धन्यवाद करते हैं कि भारत ने तिब्बतियों को शरण दी. विश्व इस समय शांति की पुकार कर रहा है और ऐसे में दलाई लामा जैसे महान लोग इसके लिए बहुत मायने रखते हैं. आशा करते हैं दलाई लामा आगे भी विश्व शांति के लिए अहम कदम उठाते रहेंगे.

दलाई लामा की ज्योतिषीय विवरणिका देखने के लिए यहां क्लिक करें.


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