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इन्हें देख आती थी दादी की याद

Posted On: 4 Mar, 2013 Others में

Special Daysव्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

महत्वपूर्ण दिवस

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बॉलिवुड में कई सितारों ने अपने अभिनय से कुछ खास चरित्रों को जीवित किया है. किसी ने खलनायक की भूमिका में तो किसी ने मां के किरदार में खुद को इस तरह पिरोया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी पर्दे से जोड़ कर देखने लगे. ऐसे ही एक कलाकार रहीं दीना पाठक. भारतीय सिनेमा जगत में दीना पाठक ने ना सिर्फ अभिनय के क्षेत्र में अपना डंका बजाया बल्कि उन्होंने थियेटर जगत को सिनेमा के साथ जोड़ने में बेहद अहम भूमिका निभाई. आइए आज दीना पाठक की जयंती पर जानें इनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें.


दीना पाठक: महिला सशक्तिकरण की पहचान

आजादी से पहले महिलाओं का रंगमंच से जुड़ाव बेहद कम होता था. ऐसे समय में भी दीना पाठक ने रंगमंच को अपनी कर्मभूमि बनाई और उसमें सफलता हासिल करने की कोशिश की. अंग्रेजों से लड़ाई की जंग में दीना पाठक ने भी अपना योगदान दिया था. उन्होंने नुक्कड़ और नाटकों द्वारा जनता को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी. गुजराती थियेटर को अपनी पहचान दिलाने में दीना पाठक का बेहद अहम योगदान रहा है. 1940 से ही दीना पाठक गुजराती थियेटरों में काम करने लगीं.


Dina Pathak Daughters

दीना पाठक ने बलदेव पाठक से शादी की थी और उनकी दो बेटियां (Dina Pathak Daughters) भी हैं जिनके नाम हैं सुप्रिया पाठक और रत्ना पाठक. दीना पाठक की बेटियां रत्ना पाठक और सुप्रिया पाठक भी हिन्दी कला जगत की चर्चित अभिनेत्री हैं. दोनों ने ही अधिकतर हास्य प्रधान टीवी कार्यक्रमों में अपनी छाप छोड़ी है.


दीना पाठक का कॅरियर

04 मार्च, 1922 को जन्मी दीना पाठक ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत एक गुजराती फिल्म से की थी. हालांकि इसके बाद उन्होंने सिनेमा से मुंह मोड़ थियेटर का ही रुख किया और फिर तकरीबन बीस साल बाद सिनेमा जगत में वापसी की.


लेकिन दीना पाठक ने जब वापस सिनेमा का रुख किया तो वह करीब 44 साल की हो चुकी थीं. इस उम्र में उन्होंने बासु भट्टाचार्य की फिल्म उसकी कहानी में काम किया जिसके लिए उन्हें बंगाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन अवार्ड से नवाजा गया. 1960 के ही समय उन्होंने कई फिल्मों जैसे सत्यकाम, सात हिंदुस्तानी और गुरु जैसी फिल्मों में भी काम किया. उनकी कुछ अन्य प्रसिद्ध फिल्मों में मौसम, किनारा, किताब, चितचोर, घरौंदा, गोलमाल, खूबसूरत आदि शामिल हैं.


दीना पाठक ने अपने कॅरियर की अधिकतर फिल्में आर्ट निर्देशकों के साथ की. ऐसा इसलिए क्यूंकि वह थियेटर जगत से जुड़ी थीं और कमर्शियल फिल्मों की चमक-दमक उन्हें पसंद नहीं थी. 80 के दशक के सबसे चर्चित टीवी शो मालगुड़ी डेज में भी वह नजर आईं.


दीना पाठक की आखिरी फिल्म साल 2003 की पिंजर रही लेकिन उनका इस फिल्म की रिलीज से पहले ही हार्ट अटैक की वजह से 11 अक्टूबर, 2002 को निधन हो गया था.


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