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Kaifi Azmi in hindi: अम्मा देखना एक दिन मैं बहुत बड़ा शायर बनूंगा

Posted On: 9 May, 2013 Others में

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kaifi azmi 1महफिलों में शिरकत करते वक्त नज्मों को बड़े प्यार से सुनाया करते थे. इसके लिए उन्हें कई बार डांट भी जाता था, एक बार तो वह रोते हुए अपनी वालिदा के पास गए और कहा कि अम्मा देखना एक दिन मैं बहुत बड़ा शायर बनूंगा. आज वही शायर कैफी आजमी (Kaifi Azmi Profile in Hindi) के नाम से विख्यात हैं.


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कैफी आजमी के पिता उन्हें एक शहजादे के रूप में देखना चाहते थे लेकिन कैफी आजमी को उससे कोई मतलब नहीं था और वह मजदूर वर्ग के लिए कुछ करना चाहते थे.


कैफी आजमी जब 24 साल के थे तो काम की तलाश में कानपुर चले आए और कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया की सदस्यता ग्रहण कर ली. 1947 में जब मुम्बई में कम्यूनिस्ट पार्टी का दफ्तर खुला तो वह मुंबई चले गए और वहीं रहकर काम करने लगे. उस वक्त तक वह शायरी की दुनिया में काफी मकबूल हो चुके थे. देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित शायरी में शिरकत करने लग गए. एक बार जब हैदराबाद में शायरी मे शिरकत करने के लिए गए तो वहां उनकी मुलाकात खूबसूरत महिला शौकत से हुई जिनसे उन्हें प्यार हो गया. बाद में दोनों ने शादी कर ली.


वैसे तो कैफी आजमी ने अपनी कविताओं में लव और रोमांस का अत्याधिक उपयोग किया है लेकिन इसके साथ-साथ गंभीर विषयों पर उन्होंने लेख लिखे हैं. उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से आम आदमी की तकलीफों को न सिर्फ बड़े प्रभावी शब्दों में सामने रखता है बल्कि उन्हें अपने हक के लिए लड़ने की ताकत भी दी.


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साल 1965 में प्रदर्शित फिल्म हकीकत में उनके लिखे गीत ‘कर चले हम फिदा जानो तन साथियों’, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ की कामयाबी के बाद कैफी आजमी सफलता के शिखर पर जा पहुंचे. आज भी यह गीत लोगों की जुबान पर रहता है.


बहुमुखी प्रतिभा के धनी कैफी आजमी का उर्दू शायरी में योगदान भुलाया नहीं जा सकता. उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.  कैफी ने फिल्म गर्म हवा की कहानी, संवाद और पटकथा भी लिखे जिनके लिए उन्हें फिल्म फेयर के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.


अपने अमर शाहकार आवारा सजदे के लिए उन्हें वर्ष 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया. वहीं साल 2002 में उन्हें इसी रचना के लिए साहित्य अकादमी फेलोशिप दी गई. हिंदी फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार के रूप में उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया. उन्हें पद्मश्री और राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.


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