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एक समर्पित अभिनेत्री शबाना आजमी

Posted On: 18 Sep, 2011 Others में

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बात चाहे ग्लैमरस रोल की हो या लीक से हटकर बनने वाली आर्ट फिल्मों की हो हर क्षेत्र में अभिनय की अपनी एक कला होती है. पर कुछ सितारे अपने आप को हर रोल में फिट कर लेते हैं. ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं शबाना आजमी. हिन्दी फिल्मों में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कमोबेश हर तरफ के रोल अदा किए हैं. फिल्मों में आज भी वह सक्रिय हैं. एक अभिनेत्री होने के साथ-साथ शबाना आजमी सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से संलिप्त रहती हैं. आज शबाना आजमी के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातों के बारे में.


Shabana-Azmiशबाना आजमी: जीवन परिचय

शबाना आजमी का जन्म 18 सितंबर, 1950 को हुआ था. उनके पिता कैफी आजमी (Kaifi Azmi) एक कवि थे. उनके भाई बाबा आजमी एक सिनेमेटोग्राफर हैं. शबाना आजमी का बचपन कलात्मक माहौल में बीता. पिता मशहूर शायर कैफी आजमी और मां रंगमंच अदाकारा शौकत आजमी के सान्निध्य में शबाना आजमी का सुहाना बचपन बीता. मां से विरासत में मिली अभिनय-प्रतिभा को सकारात्मक मोड़ देकर शबाना  ने हिन्दी फिल्मों में अपने सफर की शुरूआत की.


शबाना आजमी ने मनोविज्ञान (Psychology) में स्नातक किया है. उन्होंने स्नातक की डिग्री मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज (St. Xavier’s College) से ली है. शबाना आजमी ने एक्टिंग का कोर्स फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिटीयूट ऑफ इंडिया (Film and Television Institute of India), पुणे से किया है. एक्टिंग क्लास लेने के लिए उन्होंने “जया भादुड़ी” से प्रेरणा ली.


Shabana Azmiशबाना आजमी का कॅरियर

शबाना आजमी ने 1973 में अपने फिल्मी कॅरियर की शुरूआत की. उनकी पहली फिल्म थी श्याम बेनेगल की “अंकुर”. “अंकुर” जैसी आर्ट फिल्म की सफलता ने शबाना आजमी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई. अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ.


इसके बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया. अर्थ, खंडहर और पार जैसी फिल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया जो एक बेहतरीन अदाकारा के लिए सम्मान की बात है.


शबाना ने ग्लैमरस अभिनेत्रियों की भीड़ में स्वयं को अलग साबित किया. स्मिता पाटिल और शबाना आजमी उस दौर की समानांतर फिल्मों की जरूरत बन गईं. अर्थ, निशांत, अंकुर, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टॅन जी में शबाना आजमी ने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों पर छोड़ी. इन गंभीर फिल्मों के साथ-साथ शबाना ने मुख्य धारा की कमर्शियल फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखी. अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आजमी ने सुधी दर्शकों के साथ-साथ आम दर्शकों के बीच भी अपनी पहुंच बनाए रखी.

प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में उनका योगदान उल्लेखनीय है. फायर जैसी विवादास्पद फिल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया वहीं, बाल फिल्म मकड़ी में वे चुड़ैल की भूमिका निभाती हुई नजर आई. यदि मासूम में मातृत्व की कोमल भावनाओं को जीवंत किया तो वहीं, गॉड मदर में प्रभावशाली महिला डॉन की भूमिका भी निभायी.


भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आजमी का नाम सबसे ऊपर आता है. जीवन के छठे दशक में प्रवेश करने के बाद भी शबाना आजमी की ऊर्जा अतुलनीय है. वे आज भी रूपहले पर्दे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराती हैं.


15 पार्क एवेन्यू और हनीमून ट्रैवेल्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी फिल्मों में उनका अभिनय नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों पर हावी रहा. नई पीढ़ी की अभिनेत्रियां इस सक्षम और कुशल अभिनेत्री के सानिध्य में अपनी अभिनय क्षमता निखारने की इच्छुक  रहती हैं. पैतीस वर्ष के लंबे अनुभव के बाद भी शबाना आजमी की सक्रियता अभिनय की दुनिया में बनी हुई है. वे आज भी उसी ऊर्जा और जोश के साथ हिन्दी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं.


Shabana-Azmi-Javed-Akhtarशबाना आजमी और जावेद अख्तर

शबाना आजमी ने मशहूर लेखक जावेद अख्तर से शादी की है. जावेद पहले से शादी-शुदा थे लेकिन फिर भी शबाना के प्यार में उन्होंने तलाक ले कर शादी की. पति जावेद अख्तर के सक्रिय सहयोग ने शबाना आजमी  के हौसले को बढ़ाया और वे फिल्मों में अभिनय के रंग भरने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक मंचों पर देश और समाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अभिव्यक्त करने लगीं.


सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में शबाना आजमी ने अपनी नई पहचान बनाई. एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. वे 1997 में राज्यसभा की सदस्या मनोनीत की गईं. सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी गंभीरता के साथ निभाने के साथ-साथ उन्होंने स्वयं को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा. किसी भी गंभीर राष्ट्रीय, सामाजिक मुद्दे पर वे अपने विचार को लेकर मुखर रही हैं.


शबाना आजमी को मिले पुरस्कार

शबाना आजमी को पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जो एक रिकॉर्ड है. उन्हें पहली बार 1975 में फिल्म अंकुर, फिर 1983 में अर्थ, 1984 में खंडहर, 1985 में पार और 1999 में फिल्म “गॉडमदर” के लिए यह सम्मान दिया गया था.


शबाना आजमी को चार बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया है. 1978 में स्वामी, 1983 में अर्थ, 1985 में भावना और 1999 में फिल्म “गॉडमदर” के लिए यह पुरस्कार दिया गया था. साल 1988 में शबाना आजमी को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.


उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी ऊर्जा, उनकी सकारात्मक सोच और उनकी रचनात्मकता उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो उपलब्धियों के आसमान को छूना चाहती हैं.


साभार: जागरण याहू

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