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किसी के लिए भगवान तो किसी के लिए ठग श्री सत्य साईं

Posted On: 23 Nov, 2012 Others में

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भारत आस्था और धर्म का देश है. यहां अकसर धर्म इंसानियत पर हावी नजर आती है. यह सही है या गलत यह कहना तो बहुत मुश्किल है. 21वीं सदी में किसी को भगवान के रूप में पूजना कई बार हमारे दिमाग को झकझोर देता है. लेकिन भारत में आज भी तमाम विज्ञान और विकास के बाद भी आम आदमी का भगवान बनना जारी है और इन्हीं भगवानों में से एक थे श्री सत्य साईं बाबा (Sri Sathya Sai Baba).

बहस: क्या श्री सत्य साईं बाबा भगवान थे?


किसी के लिए भगवान तो किसी के लिए ठग

पुट्टपर्थी वाले श्री सत्य साईं किसी के तो भगवान थे पर किसी के लिए मात्र धोखेबाज ठग. श्री सत्य साईं बाबा ने अपने जीवन में कई ऐसे कार्य किए जिनकी वजह से लोग उन्हें भगवान मानने लगे. उनकी पहुंच बढ़ी तो लोग उनकी पूजा भी करने लगे. उनका मंदिर बना. देश ही नहीं विदेशों में भी उनके भक्तों की संख्या दिन दुगुनी रात चौगुनी होने लगी. लेकिन इन सब के बीच कई लोगों को एक आदमी का भगवान बन जाना रास नहीं आया. उन्होंने श्री सत्य साईं बाबा को धोखाबाज और ठग तक कह डाला लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम रही.


आस्था के साथ खिलवाड़

श्री सत्य साईं बाबा (Sri Sathya Sai Baba) जीवन भर आध्यात्मिक और समाजसेवी व्यक्ति के साथ ही विवादित व्यक्तित्व के रूप में भी चर्चित रहे. उनके धार्मिक और सामाजिक कार्यों के कारण जितने लोग उनके मुरीद बने उतनी ही संख्या में उन पर आरोप लगाने वाले भी मौजूद रहे हैं. भारत सहित विश्व के अनेक देशों में उनके द्वारा तमाम स्कूल, अस्पताल सहित कई कल्याणकारी संस्थाएं स्थापित की गईं लेकिन साथ ही उन पर व्यभिचार के आरोपों सहित लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने के भी आरोप लगाए गए.

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Sri Sathya Sai Baba Miracles: श्री सत्य साईं बाबा के चमत्कार

कहते हैं भगवान को भगवान होने का प्रमाण देना पड़ता है और भारत में भगवान होने का प्रमाण चमत्कार माना जाता है. श्री सत्य साईं बाबा (Sri Sathya Sai Baba) भी बहुत तरह के चमत्कार किया करते थे. इन चमत्कारों में से सबसे अधिक चर्चित था उनका भक्तों के ऊपर भभूत गिराना. बाबा का दावा था कि उनके हाथों में से जादुई भभूत निकलती है जो भक्तों का कल्याण करती है.


श्री सत्य साईं बाबा का दूसरा चर्चित चमत्कार चेन निकालना होता था. वह अकसर अपने भक्तों के गले में कथित जादुई तरीके से चेन डालते थे.

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श्री सत्य साईं बाबा का जीवन परिचय

आन्ध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गांव में 23 नवंबर, 1926 को सत्यनारायण राजू का जन्म एक आम मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. वे बचपन से बड़े अक्लमंद और दयालु थे. राजू संगीत, नृत्य, गाना, लिखना इन सबमें काफी अच्छे थे. ऐसा कहा जाता है कि बाबा बचपन से ही चमत्कार दिखाते थे.


आखिर कैसे बने सत्य साईं

सत्य साईं बाबा ने अपने गांव पुट्टापर्थी में तीसरी क्लास तक पढ़ाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो बुक्कापटनम के स्कूल चले गए. इसी दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने सत्यानारायण राजू को श्री सत्य साईं बाबा बना दिया. दरअसल 8 मार्च, 1940 को सत्यनारायण राजू को एक बिच्छू ने डंक मार दिया. कई घंटे तक वो बेहोश पड़े रहे. उसके बाद के कुछ दिनों में उनके व्यक्तित्व में खासा बदलाव देखने को मिला. वो कभी हंसते, कभी रोते तो कभी गुमसुम हो जाते. उन्होंने संस्कृत में बोलना शुरू कर दिया जिसे वो जानते तक नहीं थे. डॉक्टर भी उनकी बीमारी के बारे में कुछ बता नही पाए.


23 मई, 1940 को उनकी दिव्यता का लोगों को अहसास हुआ. सत्य साईं ने घर के सभी लोगों को बुलाया और चमत्कार दिखाने लगे. उनके पिता को लगा कि उनके बेटे पर किसी भूत का साया पड़ गया है. उन्होंने एक छड़ी ली और सत्यनारायण से पूछा कि कौन हो तुम? सत्यनारायण ने कहा कि मैं साईं बाबा हूं.


इस घटना के बाद उन्होंने अपने आप को शिरडी वाले साईं बाबा का अवतार घोषित कर दिया. शिरडी के साईं बाबा, सत्य साईं की पैदाइश से आठ साल पहले ही गुजर चुके थे. धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धी देश-विदेश तक फैलती गई.

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श्री सत्य साईं बाबा के वचन

श्री सत्य साईं बाबा की एक बात जो उन्हें सबसे महान बनाती थी वह थी उनकी शिक्षा जिसके अनुसार उनका कहना था कि मुझे (साईं) भगवान मानने के लिए आपको धर्म बदलने की जरूरत नहीं है. बस दिल से बाबा के भक्त बनो मैं आपका ख्याल रखूंगा. श्री सत्य साई बाबा का यह भी कहना था कि मैं और तुम सभी भगवान हैं बस फर्क इतना है कि मैंने अपने आप को पहचान लिया है और तुम अपने आप से बिलकुल अनजान  हो.


श्री सत्य साई बाबा की प्रसिद्धि इतनी ज्यादा है कि देश-विदेश में इनके केन्द्र जगह-जगह खुले हैं. बाबा को आने वाला दान पुण्य तमाम सामाजिक कामों जैसे अस्पताल और स्कूलों में खर्च होता है. देश-विदेश में कई जगह श्री सत्य साईं बाबा के नाम से स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोले गए हैं. बाबा के भक्त हर साल लाखों-करोड़ों का दान करते हैं.


24 अप्रैल, 2011 को श्री सत्य साईं बाबा का निधन हो गया. एक आम बालक से भगवान तक का सफर करने वाले श्री सत्य साईं बाबा का जीवन वाकई आश्चर्यजनक है लेकिन साथ ही यह हमारे समाज पर भी सवाल करता है कि कहीं हम पर अंधविश्वास हावी तो नहीं हो रहा?



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