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इन दंगों से बता हासिल ही क्या हुआ

Posted On: 16 Sep, 2013 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

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सोंपा था चमन जिसे माना था बागबां
इंसानियत की कॉम का समझा था रहनुमां
कुछ पग चला था साथ में
फिर थमा के मेरे हाथ में
खून से सना हुआ खंजर गुजर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया

धर्मान्धता का जूनून था
आँखों में भरा खून था
कल जलाया था उसका मकाँ
आज जल रहा था मेरा आशियाँ
देख ये तमाशा वो
घर से गुजर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया

इन दंगों से बता
हासिल ही क्या हुआ
लख्ते जिगर गया तेरा तो
मेरा भी पुत्र कटा
बुझते चिराग घर के देख
वो जुबाँ से मुकर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया

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