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जनहित जागरण (काले बादलों में सुनहरी किरण)

Posted On: 21 Feb, 2016 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

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आजकल पूरे देश में मीडिया के द्वारा नकारात्मकता का एक ऐसा काल्पनिक माहौल बना दिया गया है जिसे देख मन नकारात्मक विचारों से भर जाता है और यह लगने लगता है की समाज में सब कुछ गलत ही हो रहा है जबकि यह मीडिया में बैठे कुछ धन लोलुप और स्वार्थ में लिप्त लोगों के द्वारा किया जा रहा है यहां तक की इस नकारात्मक विचारों से बचने के लिए लोगों ने प्राइवेट चैनल छोड़ फिर से दूरदर्शन में खबर देखना शुरू कर दिया है
ऐसे बिगड़ते माहौल में दैनिक जागरण ने एक अनूठी पहल की है वह है ” जनहित जागरण ” यानी कि सकारात्मकता का प्रचार I जहां एक ओर मीडिया द्वारा देशद्रोह आतंक आदि कि घटनाओं को बड़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है वही इस जनहित जागरण की खबर में समाज के आम इंसानों द्वारा किये जाने वाले समाज हित के कार्यों का उल्लेख किया जाता है वही दूसरी और इन्हे समाज के सही नायक के रूप में पेश किया जाता है जिससे समाज में लोगों को समाजहित में कुछ करने कि प्रेरणा मिलती है
उदाहरणतः जबसे निर्भया के केस को मीडिया ने ज्यादा से ज्यादा दिखाया तब से इस प्रकार की घटनाओं में इज़ाफ़ा ही हुआ आप जो दिखाएंगे समाज में वही ज्यादा घटित होगा इसका अर्थ यह नहीं की आप ऐसी घटनाएं दिखाए ही नहीं वरन इन घटनाओं को जरूरत से ज्यादा तवज्जो न दे और एक बलात्कारी या हत्यारे को हीरो के रूप में पेश ना करें

सच ही तो है जो हम देखते हैं उसका हमारे मनोमस्तिष्क पर गहरा असर पड़ता है जाइए की हम यदि १०० लोगों को बलात्कार की घटना दिखाते हैं तो ९० लोगों के मन में घृणा का भाव आता है और १० शैतान मानसिकता वाले लोगों में इसको करने के प्रति लालसा जागती है इसके विपरीत यदि इसी प्रकार किसी वृक्षारोपण के बारे में दिखाया जाय तो ९५ लोगों के मन में वृक्षर्पण की भावना पैदा होती है कुछ इस पर अमल भी करते हैं परन्तु नकारात्मकता किसी के भी मन में नहीं जागती
ये ” जनहित जागरण ” सबक है उन मीडिया के दलालों के लिए जिन्होंने देशद्रोही , आतंकी आदि का महिमामंडन कर केवल अपना उल्लू साधना शुरू किया है अब समय आ गया है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी इस अखबार से कुछ सीखे और ऐसे ही कुछ नए कार्यक्रमों कि पहल करे मुझे याद है जब दूरदर्शन का उतना प्रसार नहीं हुआ था रेडियो में गाने सुने जाते थे तब स्वतंत्रता दिवस पर लहराते तिरंगे को देख रेडियो में वन्दे मातरम आदि देशभक्ति के गाने सुन रोंगटे खड़े हो जाय करते थे और देश के प्रति कुछ कर गुजरने कि लालसा जागती थी आज वही तिरंगा लहराने और वन्दे मातरम को मीडिया एक बहस का मुद्दा बनाने लगा है
मीडिया में जो भी दिखाया जाता है वह पूर्ण सत्य नहीं है मीडिया किसी भी एक प्रतिशत नकारात्मक घटना को दिन भर इतना दिखाता है की हमें वह १०० प्रतिशत सही लगने लगते है
अब इस जनहित जागरण को ही पड़कर मन सकारात्मकता से भर उठता है लगता है आज भी एक आम आदमी देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर समाज में योगदान दे रहा है तो अपना मन भी समाज के लिए कुछ कर गुजरने को लालायित होने लगता है काश और अखबार भी दैनिक जागरण से कुछ सबक ले और अपने समाचार पत्र में इसी प्रकार का एक कॉलम शुरू करें तथा मीडिया भी अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर कुछ देश और समाज कि खातिर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाये और ख़बरों में आतंकी और देशद्रोहियों का महिमा मंडन ना कर एक आम आदमी को एक हीरो के रूप में पेश करे जो समाज के प्रति अपना सब समर्पित कर योगदान दे रहे हैं

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल

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