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दीप और बाती (kavita)

Posted On: 3 Oct, 2013 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

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एक दिन एक बाती
दीप से यूं मिल गयी
बोली कौन सा पड़ाव है
उम्र का ठहराव है
मैं जन्म से मलंग हूँ
अपने आप में स्वच्छंद हूँ
बाती अलविदा हुई
दीप से जुदा हुई
अंधकार छा गया
बाती में विकार आ गया
दीप में विकास न रहा
बाती में प्रकाश न रहा

एक दिन एक बूँद
सीप में समां गयी
आते ही घबरा गयी
ये कहाँ मैं आ गयी
मन में जंग छिड़ी हुई
सीप से घिरी हुई
जल के एक बहाव में
बूँद वो निकल पड़ी
अब न कोई प्रभुत्व था
न कोई अस्तित्व था
जाने कहाँ वो खो गयी
माती में विलीन हो गयी

बाती हो या दीप हो
बूँद हो या सीप हो
जब तक वो संग संग हैं
जिंदगी में रंग हैं
मोती का विकास है
दीप में प्रकाश है
बाती का उपदेश है
जीवन का ये सन्देश है

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