blogid : 14778 postid : 775274

प्रयास

Posted On: 21 Aug, 2014 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

174 Posts

948 Comments

मैंने बरसों पहले भावनाओं के कुछ बीज बोये थे
अनजान रिश्तों के कुछ सपने संजोये थे
कल्पनाओं के केनवस पर एक उपवन खींचा था
अंजलि भर आस्था के जल से नित सींचा था
श्रद्धा की ईंटों से बनाई वो क्यारी थी
विश्वास की वो अटूट फुलवारी थी

बीजों के अंकुरण का इंतज़ार था
उन दानों को मुझपर ऐतबार था
वो बीज माटी में फिर अंकुरित हुए
गैरों से भी नए रिश्ते सृजित हुए
हवा मिली एक नवीन सद्भावना की
पुष्प पल्लवन की मनोकामना की

बरसों बाद आज भावनाओं के वो दाने
आस्थाओं के दरख्तों में तब्दील हो चुके हैं
जिनमे श्रद्धा की कलियाँ खिली हैं
विश्वास के फल लदे हैं
सद्भावना के पत्तों से छनकर
रिश्तों की गुनगुनाती धुप
सबमे नया जोश भर रही है
और सर्वे भवन्तु सुखिनः की
मनोकामना को पूर्ण कर रही है

दीपक पाण्डे
नैनीताल

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग