blogid : 14778 postid : 627058

बलि या कुर्बानी एक ही बात है बकरे के लिए (जागरण जंक्शन फोरम)

Posted On: 16 Oct, 2013 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

174 Posts

948 Comments

बलि या कुर्बानी एक्को ही बात है बकरे के लिए
हिन्दू धर्म में बलि की प्रथा हो या मुस्लिमो में कुर्बानी काटना तो आखिर बकरे को ही है आखिर ये धर्म के साथ हिंसा को जोड़ने का क्या औचित्य है कहते हैं इब्राहीम ने अपने सबसे प्रिय पुत्र की कुर्बानी दे दी थी अल्लाह के नाम पर कुर्बानी तो अपनी सबसे प्रिय वास्तु की दी जाती है वह बाजार से ख़रीदा गया पशु तो हो नहीं सकता या फिर वह बेजुबान जानवर तो नहीं हो सकता जिसे पला ही मारने के लिए जा रहा हो
हिन्दू धर्म में भी मान्यता है की किसी कार्य के पूर्ण होने पर देवी के समक्ष बलि दी जाती है परन्तु इश्वर को खुश करने के लिए पशु पर ये अत्याचार और हिंसा क्यूँ इस बलि को सांकेतिक भी किया जा सकता है जैसे की बलि में बकरे के स्थान पर नारियल को फोड़ कर देवी को समर्पित किया जाय
जैसे की जब इब्राहीम ने अपने पुत्र को अल्लाह को समर्पित किया तो उन्होंने अपने आँखों में पट्टी बांध ली थी पट्टी हटाने पर उन्होंने देखा की पुत्र जिन्दा है तथा उसके स्थान पर एक मेमना कटा है यानि अल्लाह ने सांकेतिक रूप में बलि के कुर्बानी के नाम पर मेमने को मन इसी प्रकार मेमने की कुर्बानी भी सांकेतिक हो सकती है जैसे की राज्य सभा की उपसभापति आदरणीय नजमा हेपतुल्लाह के अनुसार वो जितने पैसों का बकरा कुर्बान करना चाहती हैं उतने धन का गरीबों में दान कर देती हैं कुर्बानी भी हो जाती है हिंसा भी नहीं होती तथा गरीबों का भी भला हो जाता है

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग