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बैलगाड़ी काठ की (बाल कविता)

Posted On: 22 Feb, 2017 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

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बैलगाड़ी काठ की
होगी मस्ती ठाठ की
नानी के गांव छुट्टी में
ऐश दिन और रात की
मेला इसी मैदान में
ठेली होगी चाट की
मिलजुल कर सब खेलेंगे
उम्र पच्चीस की या साठ की
अपनी ही धुन में नाचेंगे
न फिक्र मम्मी की डांट की
न कोई बात किताबों की
न सोलह दूनी आठ की
बाद दिन भर की थकान के
होगी जरुरत खाट की
स्वप्न में लीला अनोखी
परियों के पंचाट की
फिर से एक सुबह अनूठी
नयी नयी सौगात की

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल

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