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माँ [कविता](महिला दिवस पर विशेष )

Posted On: 7 Mar, 2014 Others में

CHINTAN JAROORI HAIजीवन का संगीत

deepak pande

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माँ

खुशियाँ हैँ जहाँ खेलती वो मेरा ही घर है

सब कहते हैँ मेरी माँ की दुवाओँ का असर है

मैँ भूल के भी उस से जुदा हो नहीँ सकता

मेरी हर एक साँस मेँ उसकी ही बसर है

एक दिन वो टूट कर कुछ ऐसी बिखर गयी

दुनियाँ की हर एक माँ मेँ आती वो नजर है

ख्वाबोँ मेँ भी कोई गम हो तो वो मेरे साथ है

मेरे हर एक गम की मेरी माँ को खबर है

वो मुझ से रूठ कर कहीँ सितारोँ मेँ बस गयी

जिस जहाँ से न लौटा कोई वो ऐसा नगर है

दीपक पाण्डे नैनीताल

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