blogid : 14001 postid : 6

यादों का सफ़र

Posted On: 7 Feb, 2013 Others में

असमंजस Just another weblog

deepak khanduri

5 Posts

13 Comments

एक उम्र बीत गयी पहचान बनाते बनाते
आज लोगो ने पहचाना तो हम खुद को भूल गए.

दिल पे जाने क्यों दस्तक देता है मेरा बचपन
कुछ देर को दरवाज़ा खोल तो आंसू निकल गए.

जब तक चलता रहा अंगारों पर,चेहरे पे शिकन न थी
आज दो पल फुर्सत के क्या मिले,पुराने जख्म उभर गए.

दुनिया की रफ़्तार से कदम मिलाते हुए निकल गए बहुत आगे
आज लगा की मंजिल करीब है,मगर अपने तो भीड़ में ही बिछड़ गए…

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग