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सोचता हूँ मैं.."valentine contest "

Posted On: 14 Feb, 2011 Others में

अंधेरगर्दीआम आदमी का दर्द ......

दीपक पाण्डेय

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प्रस्तुत पंक्तिया मुझे एक दोस्त ने भेजी थी . मुझे पसंद आने के बाद मैंने उसमे कुछ और जोड़ कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ…
सोचता   हूँ   के उसे नींद भी आती होगी ,

या मेरी तरह फ़क़त अश्क बहाती होगी ?

वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली ,

अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी?

इस ज़मीन पर भी है सैलाब मेरे अश्कों से,

मेरे मातम की सदा अर्श हिलाती होगी ?

शाम होते ही वो चोखट पे जला के शमां,

अपनी पलकों पे कई खाब सुलाती होगी ?

उस ने सिलवा भी लिए होंगे स्याह लिबास,

अब राम जाने किस तरह दीवाली मानती होगी?

होती होगी मेरे बोसे की तलब मे पागल ,

जब भी जुल्फों मे कोई फूल सजाती होगी ?

मेरे तारीक़ ज़मानों से निकालने वाली ,

रौशनी तुझ को मेरी याद दिलाती होगी?

दिल की मासूम रगें खुद ही सुलगाती होंगी ,

ज्योंही तस्वीर का कोना वो जलाती होगी ?

रूप दे कर मुझे उस में किसी शाहज़ादे का,

अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी?

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