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कौन हूँ मैं

Posted On: 8 Oct, 2012 Others में

कहना हैकई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

RAJEEV KUMAR JHA

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कौन हूँ मैं

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,

एक झूठ है आधा सच्चा सा .

जजबात को ढके एक पर्दा बस ,

एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .


जीवन का एक ऐसा साथी है ,

जो दूर न हो के पास नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


हवा का एक सुहाना झोंका है ,

कभी नाज़ुक तो कभी तूफानों सा .

शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,

कभी अपना तो कभी बेगानों सा .


जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,

जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .


एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,

यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .

यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,

पर कभी – कभी आँखों को नम कर जाता है .


यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,

पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ………

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