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चंद्रलोक के राजा(बाल कविता)

Posted On: 19 Jun, 2012 Others में

कहना हैकई बार बहुत कुछ कहने का मन करता है.लेकिन शब्द नहीं मिलते.कागज कोरे ही रह जाते हैं.शब्द जब लेखनी के रूप में ढलता है तो इस ब्लॉग के रूप में प्रकट होता है.

RAJEEV KUMAR JHA

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813 Comments

यह कविता इस मंच के नन्हें मुन्हें पाठकों के लिए.बरसों पहले लिखी यह कविता अब तक कहीं प्रकाशित नहीं हो पाई.

th_moon-boy[1]
चंदामामा चंद्रलोक के नहीं रहे क्यों राजा
रूस अमेरिका वाले अब हैं वहां बजाते बाजा

मम्मी मामी कहाँ गई जो थीं सुन्दर पटरानी
मंगल ग्रह को चली गई क्यों नानी भरने पानी

मौसी क्यों न मिठाई भेजे जाकर वहां झगड़ते
पप्पा जी से पूछो जो नित अख़बारों को हैं पढ़ते

दो अम्मा सन्देश चलूँगा डैडी की ससुराल
तेरे पीहर पकें पकौड़े खाकर बनूँ निहाल

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