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देशी-विदेशी पक्षियों से गुलजार है जगतपुर झील

Posted On: 24 Dec, 2018 में

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भागलपुर का जगतपुर झील, देसी-विदेशी पक्षियों से गुलजार है। 400 हेक्‍टेयर में फैला यह झील प्रवासी पक्षियों के अलावा बड़े-बड़े शोधकर्ताओं के लिए असाधारण प्रयोगशाला से कम नहीं है। खास बात यह कि यहां पक्षियों का संरक्षण स्थानीय समुदाय की जागरूकता की वजह से हो रहा है। जगतपुर झील जबरदस्‍त संभावनाओं से भरा हुआ है। इस जलाशय में प्रवासी पक्षियों को पर्याप्‍त सुरक्षा और भोजन मिल रहा है, इसलिए वे सर्दी के मौसम में यहां आशियाना बना लेते हैं। हालांकि वे गर्मी के आरंभ में अपने मूल स्‍थान को लौट जाएंगे।
भागलपुर से नवगछिया जाने के क्रम में विक्रमशिला सेतु पार करते ही मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर बाईं ओर झील का बड़ा भू भाग है। यहां पहुंचकर रंग-बिरंगे पक्षियों को देखना और उनकी कर्णप्रिय करलब को सुनना किसी प्रकृति प्रेमी के आनंद को बढ़ा देता है। बाढ़ के दिनों में गंगा नदी जगतपुर झील तक फैल जाती है। बाढ़ समाप्‍त होने के बाद झील मछुआरों के लिए मछली पालन का जरिया है तो पक्षियोंं के लिए आहार-विहार का केंद्र। गर्मी के मौसम में यह झील सिमटता जाता है लेकिन यहां पक्षियों की तादाद कम नहीं होती। कारण झील पूरी तरह से नहीं सूखता और इसमें उन्‍हें पर्याप्‍त भोजन मिल जाता है और झील के चारों ओर फैले वृक्षों पर सुरक्षित आश्रय। झील ज्‍यों-ज्‍यों सूखता जाता है, वहां स्‍थानीय लोग कृषि कार्य कर शानदार फसल उपजाते हैं। जगतपुर की पक्षियों के साथ यहां के किसानोंं की मित्रता है। वे इनकी रक्षा जी-जान से करते हैं। बदले में पक्षी भी इनकी फसलों की रक्षा कीट, चूहे आदि से करते हैं।
फ‍िलहाल भारतीय पक्षियों के साथ प्रवासी पक्षी भी जगतपुर झील में नजर आ रहे हैं। उनमें ग्रे हेडेड लैपविंग यानी सिलेटी सर टिटहरी, मालगुझा, वुड सैंडपाइपर यानी भूरा चौबाहा, रेड शैंक यानी सूरमा चौबाहा और कूट यानी सरार और प्रवासी बतख की प्रजाति के गार्गनी यानी चैता शामिल हैं। इसके अलावा कॉटन टील यानी गिर्री जो कि हमारे देश में प्रजनन करने वाली बतख की प्रजाति है, इसकी सौ की संख्या में मौजूदगी भी आश्चर्यजनक है। समान्यतया इतनी संख्या में गिर्री को देखना दुर्लभ होता है। लिटिल ग्रीब, कोंब डक, पेंटेड स्नाइप, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट जैसे पक्षी समान्यतया झीलों और तालाबों में रहना अधिक पसंद करते हैं, परन्तु गंगा नदी में बने कोल, ढाब और छाडऩ में भी ये पक्षी दिखाई दे रहे हैं। इन पक्षियों का प्रजनन भी गंगा के क्षेत्र में होता है।

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