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आज कल के प्रेमियों को

Posted On: 14 Feb, 2011 Others में

पहचानखुद से, जिंदगी से और खुशियों से

div81

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आज कल के प्रेमियों को
सस्ते  के भाव बिकते हुए देखा

कालेज  के चौराहों पर दिल को
प्रसाद कि तरह बांटते हुए देखा

आज बाहें डाले किसी के साथ तो
कल उसी को किसी और के साथ देखा

मोहब्बत को भी अमीरी गरीबी की
रेखाओं के बीच बंटते हुए देखा

आज कल के प्रेमियों को ………….
सस्ते के भाव बिकते हुए देखा

इश्क में भी अब नयी तरकीबे बनते हुए देखा
डेटिंग पर प्यार कि सेटिंग करते हुए देखा

नौजवानों में एक नया फंडा  देखा
जिसकी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं

उसे १४ फेब का इंतजार करते हुए देखा
मोहब्बत  को भी बेबस होते देखा

हसीनों को गिफ्ट के लालच में फंसते हुए देखा
आज कल के प्रेमियों को

बेमोल के भाव बिकते हुए देखा
उस पर भी ये इश्क आशां नहीं कि तर्ज में

हर ऐरे गैर को प्रेम दिवस में (वेलेंटाइन डे)
यह रोग लगते हुए देखा

आसमां छूते दाम और प्यार के नाम पर
सजी दूकानों पर तोड़ फोड़ मचाते हुए देखा

गली मौहल्लो और चौक से बाहर
प्यार को इन्टरनेट पर होते हुए देखा

प्यार का इजहार भी नेट पर ही
इकरार भी नेट पर होते हुए देखा

शादियाँ भी आन लाइन  हैं
बच्चे भी हो जाएँ ऑन लाइन

तो कोई हैरत नही
जमाना है आधुनिक अब

यह आठवाँ अजूबा भी होते हुए देखा

आज कल के प्रेमियों को

सस्ते  के भाव बिकते हुए देखा

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