blogid : 3085 postid : 40

"ऐसा हो गर जहाँ कोई"

Posted On: 18 Oct, 2010 Others में

पहचानखुद से, जिंदगी से और खुशियों से

div81

56 Posts

1643 Comments

दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ

मैं एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हूँ

जहाँ गम के बादल ठहरते न हो

आंसू की बारिश बरसती न हो

जहाँ लोगो का विश्वास हो अपनों पर

दुखो का बाज़ार सजता न हो

सजती हो जहाँ पर महफिलें दोस्तों की

दुश्मनों का पता कोई पूछता न हो

जहाँ दुनियां हो पर दुनियांदारी न हो

जहाँ दिल से मिले दिल उसमे मेहरबानी न हो

जुबान में दुआएं हो, किसी की दुवांये खाली न हो

टूटे  बिखरे न कोई ख्वाब हो

मंजिलें बासिंदों की खुद तलबगार हो

जहाँ प्यार का नाम सिर्फ मिलन हो

जहाँ राधा की मोहन से जुदाई न हो

“मोहबत जहाँ सब की पूरी हो अधूरी न कोई कहानी हो”

जहाँ दर्द भी सब का अपना सा हो

एक आँख का मोती सब के संग ढले तो वो सागर का सा पानी हो

मैं एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हूँ

दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ

“DIV”

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग