blogid : 7977 postid : 672344

घी के गुण :आयुर्वेद की संहिताओं से!

Posted On: 18 Dec, 2013 Others में

आयुष दर्पणडॉ.नवीन जोशी का ब्लॉग

डॉ.नवीन जोशी

58 Posts

32 Comments

आपने घी के खाने और न खाने के बारे में कई चर्चाएँ सुनी होंगी,यह भी सुना ही होगा कि भाimages.jpgई घी ज्यादा मत खाओ चर्बी बढ़ जायेगी,कोलेस्ट्रोल बढ़ जाएगा तथा वजन बढ़ने के साथ-साथ उच्चरक्तचाप सहित हृदयाघात का ख़तरा भी हो सकता हैI

आइये मैं आपको घृत के बारे में बताये गए कुछ आश्चर्यजनक तथ्य आयुर्वेद की संहिताओं के सन्दर्भ   से लेकर प्रस्तुत कर रहा हूँ  :-

आचार्य चरक ने चरक संहिता अध्याय 15  के 201- 203वें सूत्र में बताया है :

स्नेह्मेव परं विद्याद दुर्बलानलदीपनम!!

नालं समिद्धस्य समयान्नम सगुर्वपि !

मन्दाग्निर्विपक्वं तु पुरीषम योतिसार्यते !!

दीपनीयौषधेयुर्क्ता घृत मात्रा पिबेतु स:!

तथा समाना : पवनः प्रसन्नो मार्गमास्थितः :!!

अग्नि समीपचारित्वादाशु प्रकुरुते बलम !

…………………………………………………

-कमजोर अग्नि (पाचन शक्ति ) को दीप्त (ठीक ) करने की सबसे उत्तम औषधि स्नेह है और इससे तीव्र हुई अग्नि को गुरु अन्न

(भारी भोजन )भी शांत नहीं कर सकता है ,कहने का सरल अर्थ है कि यदि किसी रोगी की अग्नि मंद हो तो स्नेह से बेहतर कोई और उत्तम विकल्प नहीं हो सकता है और इस प्रकार अग्नि के प्रज्वलित हो जाने पर फिर गुरु- आहार भी उसे शांत नहीं कर सकती, अर्थात वैसा व्यक्ति गरिष्ट भोजन को भी पचाने में सक्षम होता है I

-अग्नि के मंद हो जाने से पीड़ित रोगी यदि अप्क्व मल ( भोजन के सही ढंग से नहीं पचने की स्थिति में निकलने वाला मल ) को त्याग करता है तब भी दीपन गुणों से युक्त औषधि से सिद्धित घृत का प्रयोग रोगी के बल एवं मात्रा को ध्यान में रखते हुए  कराना चाहिए I

-मात्रा पूर्वक घी का सेवन करने से समान वायु (नाभिमंडल में स्थित ) प्रसन्न होकर अपने स्वमार्ग में चली आती है और अग्नि के समीप स्थित होने के कारण इसे और अधिक बल प्रदान करती है I

इतना ही नहीं आचार्य चरक ने इससे आगे के सूत्र 204  में उद्धृत किया है :-

काठिन्याद्यः पुरीषम तु कृच्छमुंचति  मानवः !!

सघृतं लवण युक्तं नरोन्नiवग्रहम पिबेत !

यदि अग्नि मंद होने के कारण रोगी कठिन मल का त्याग कर रहा हो और उसे मल त्याग में परेशानी हो रही हो तो लवण (नमक) से युक्त घी का प्रयोग भोजन के मध्य में कराया जाना चाहिए I

ये कुछ ऐसे सन्दर्भ हैं जो घी के बारे में उपस्थित जनभ्रान्ति को दूर करने में मददगार होंगेI

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग