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यूपी विधानसभा चुनाव : अब “राम” का सहारा क्यूं नहीं

Posted On: 4 Feb, 2012 Others में

Electionचुनावों पर गहरी नजर

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कहा जाता है प्यार और युद्ध में सब जायज होता है. कलयुग में चुनाव किसी युद्ध से कम नहीं. यहां हर वह मुद्दा जो वोटरों को ललचा सके नेताओं के लिए सोने की तरह होता है. लेकिन कहते हैं ना कि समय के साथ सोने की चमक भी कम हो जाती है. इसी तरह कभी हमेशा यूपी चुनावों का अहम मुद्दा रहा अयोध्या का राम मंदिर आज चुनावी रैलियों से गुम हो गया है. जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने का खेल तो जारी है लेकिन कोई “राम” का नाम लेने को तैयार नहीं.


up election 2012:आज अगर यूपी में देखा जाए तो सिर्फ भाजपा को छोड़ कोई भी राममंदिर के मुद्दे को उठाने में विश्वास नहीं रखता. कांग्रेस उलटा राम मंदिर बनवाने के भाजपा की घोषणा की निंदा करती है तो बसपा को इससे कोई मतलब ही नहीं. सपा अगर राम मंदिर को अपना लक्ष्य बनाती है तो उसके मुस्लिम वोट बैंक पर सेंध मारने के लिए विपक्षियों को गोल्डन मौका मिलेगा. ऐसे में राम मंदिर का मुद्दा उठाया है भाजपा ने.


ऐसे तो हर पार्टी ही राम मंदिर को अपना मुद्दा बनाना चाहती होगी लेकिन यूपी की मुस्लिम आबादी उन्हें ऐसा करने से रोक रही है. सब जानते हैं यूपी में मुस्लिम वोटरों की संख्या बेहद अच्छी है. मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए वहां अल्पसंख्यक आरक्षण देने की कवायद भी चल रही हैं. सपा और कांग्रेस तो किसी भी हालत में अपने मुस्लिम वोटरों को नहीं खोना चाहेंगे. सपा का तो एक बड़ा वोट बैंक मुस्लिम ही हैं. अब ऐसे में हमेशा की तरह भाजपा ही सिर्फ इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है.


भाजपा का एक इतिहास रहा है कि वह ज्यादातर हिंदुओं की तरफ झुकी रहती है. और यही वजह है कि कई लोग इसे हिंदूवादी पार्टी भी मानते हैं. राम मंदिर और अयोध्या का राग भाजपा के लिए बहुत पुराना है हालांकि इस पर उन्हें कभी जीत नहीं मिलती लेकिन वह जानते हैं एक दिन जरूर यह मुद्दा उन्हें सफलता दिलाएगा. भारतीय जनता पार्टी ने युवकों और किसानों को किसी भी पार्टी से अधिक सुविधाएं देने और राम मंदिर के निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करने का संकल्प दोहराया है.


राम मंदिर पर भाजपा के कथन

भाजपा का मानना है कि अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण देश के करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम राष्ट्र की अस्मिता, गौरव और गरिमा के प्रतीक हैं, मगर खेद की बात यह है कि कांग्रेस, सपा, बसपा और वामपंथियों की छद्म धर्मनिरपेक्षता तथा वोट बैंक की राजनीति के कारण इसका विरोध हो रहा है. भाजपा राममंदिर निर्माण के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने के लिए वचनबद्ध है.

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