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ओमपुरी की इस एक्टिंग को देखकर जलने लगे थे नसीरुद्दीन शाह, पुराने दिनों का दिलचस्प किस्सा

Posted On: 18 Oct, 2017 Bollywood में

खजाना मस्तीजब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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‘जंग कोई भी हो, नतीजा कुछ भी हो. एक सच्चा सिपाही अपना कुछ न कुछ खो ही देता है.’

1997 में रिलीज हुई ‘चाइना गेट’ का ये डायलॉग, ओमपुरी ने इतने दमदार आवाज में बोला था, कि उस समय सिनेमा हॉल तालियों और सीटियों की आवाज से गूंज उठा था.


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ओमपुरी की फिल्में ऐसी जिनमें समाज का असल चेहरा और राजनीति की स्याह हकीकत दिखाई देती है. ओमपुरी की पहली फिल्म की बात करें, तो ज्यादातर गंभीर फिल्मों में काम करने वाले इस अभिनेता की पहली फिल्म थी ‘चोर-चोर छुप जा’, जो पूरी तरह बच्चों की फिल्म थी. इसके बाद ओम ने कई मराठी और कन्नड़ फिल्मों में काम किया. उनकी पहली हिंदी फिल्म थी ‘भूमिका’. जिसमें उनका छोटा लेकिन दमदार रोल था. ओमपुरी के फिल्म जगत में कई दोस्त-दुश्मन रहे, लेकिन अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से उनका एक अलग ही याराना था. आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं, ओमपुरी और नसीरुद्दीन शाह की दोस्ती से जुड़ा एक किस्सा.


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जब ओमपुरी की एक्टिंग देखकर जल गए थे नसीरुद्दीन

अपनी किताब ‘And Then One Day’ में नसीरुद्दीन ने ओमपुरी से जुड़ा एक किस्सा लिखा है.

बात उन दिनों की है, जब हम दोनों नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में पढ़ा करते थे. ओम क्लास में बहुत शालीन, कम बोलने वाला और ज्यादातर समय खुद के साथ बिताने वाला लड़का था. फाइनल ईयर के बाद जैसे ही हम छुट्टी से लौटे, काबुकी प्ले ‘इबारगी’ के लिए ऑडिशन हो रहे थे. मुझे इस तरह के प्ले के बारे में बहुत कम जानकारी थी. इस प्ले में एक्टिंग के स्टूडेंट को चुना जाना था. हम डायरेक्शन के स्टूडेंट थे. इस प्ले में काम करने के लिए एक्टिंग थोड़ी अलग किस्म की चाहिए थी. मुझे वैसी एक्टिंग करने में थोड़ी परेशानी थी, लेकिन साथ में मुझे यकीन था कि इस रोल के लिए मुझसे बेहतर लड़का मिल ही नहीं सकता.


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अगले दिन, मैं डायरेक्शन के काम में बिजी था. अचानक मैंने देखा कि ओम इस प्ले के लिए रोल कर रहा है. ऐसा सधा हुआ रोल. ओम से नजर हटा पाना मुश्किल था. मुझे उससे जलन हो रही थी, लेकिन ओम की एक्टिंग को नजरअंदाज करना बहुत मुश्किल था. उस दिन के बाद से ओम सभी की नजरों में चढ़ गया. मुझे भी धीरे-धीरे ओम में बुराईयों से ज्यादा अच्छाईयां दिखने लगी. आगे चलकर हम दोनों ने ‘आक्रोश’ में साथ काम किया. गोविंद निहलानी की इस फिल्म में मुझे चुप रहने वाला आदिवासी और ओम को वकील का रोल मिला…Next

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