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100 फिल्मों के बाद भी ढाबे पर काम करने लगे थे संजय मिश्रा, 1999 वर्ल्ड कप ने बदली जिंदगी

Posted On: 6 Oct, 2017 Bollywood में

खजाना मस्तीजब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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‘एक जिंदा इंसान कभी भी अपना सफर शुरू कर सकता है’. वो बेशक बॉलीवुड के टॉप सितारों में नहीं हैं, लेकिन काबिल सितारों में उनका नाम सबसे पहले आता है. संजय मिश्रा, एक ऐसे सितारे जिन्होंने कॅरियर की शुरूआत कई छोटे-मोटे रोल से की. 1991 में ‘चाणक्य’ टीवी सीरियल से संजय को ब्रेक मिला, लेकिन इस सीरियल को करने के बाद संजय को लगा कि ये वो नहीं है, जो वो करने के लिए इंडस्ट्री में आए हैं.


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1999 वर्ल्ड कप विज्ञापन टर्निंग प्वाइंट रहा

क्रिकेट के दीवाने हैं तो आपको ‘मौका-मौका’ विज्ञापन सीरीज याद ही होगी. कुछ ऐसा ही विज्ञापन 1999 के वर्ल्ड कप में भी टीवी पर छाया हुआ था, जिसमें संजय ने एप्पल सिंह का किरदार निभाया था. उस टेलीविजन कर्मशियल की लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लोग संजय को एप्पल सिंह नाम से ही पुकारने लगे थे.


sanjay


ऑफिस-ऑफिस के शुक्ला जी

हास्य-व्यंग्य से भरपूर ऑफिस-ऑफिस में निभाया शुक्ला जी का किरदार भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद संजय ने करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया लेकिन ‘मसान’ और ‘आंखों देखी’ फिल्मों में उनके जबर्दस्त अभिनय की तारीफ उनके आलोचकों ने भी की.


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वो दौर जब ढाबे पर काम करते थे संजय

संजय अपने पिता की मौत के बाद खुद को अकेला महसूस करने लगे थे, ये वो दौर था जब संजय ने कई फिल्मों में काम तो किया था, लेकिन उन्हें वो पहचान नहीं मिल पाई थी, जिसके वो हकदार थे, इसलिए संजय ने सबकुछ छोड़कर ऋषिकेश जाने का फैसला किया. वो ऋषिकेश में एक ढाबे पर काम करने लगे, उन्हें किसी ने पहचाना भी नहीं.



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अगर रोहित नहीं मनाते तो वापस नहीं लौटते संजय

संजय अपने पिता की मौत से इतना टूट चुके थे, कि अपनी पूरी जिंदगी ऋषिकेश में ही बिताने वाले थे, लेकिन रोहित शेट्टी ने उन्हें अपनी फिल्म ‘ऑल दी बेस्ट’ के लिए मनाया. इस तरह संजय ने फिर से वापसी की.


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एक किस्सा ये भी…

संजय जब दिल्ली से मुंबई जा रहे थे, तो उनकी मां रेलवे स्टेशन उन्हें छोड़ने आई थीं. जैसे ही रेलगाड़ी चलने लगी माताजी की आंखें भर आईं. खिड़की की सलाखें पकड़े-पकड़े तीन-चार कदम साथ चलने के बाद वो अपनी रुलाई नहीं रोक पाईं.

शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा जिन बड़े सपनों को लेकर हिंदी फिल्मों की दुनिया में कदम रखने के लिए बंबई की ट्रेन में सवार है, वो साकार हो पाएंगे, लेकिन आज संजय किस मुकाम पर हैं, ये बात हर कोई जानता है.

अपने काम के बारे में संजय कहते हैं ‘हर कोई एक्टर नहीं होता, किसी-किसी फिल्म में मैं भी एक्टर नहीं हूं’. …Next


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