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पुनीत इस्सर का वो एक घूंसा जिसने उन्हें बना दिया रियल लाइफ ‘विलेन’, 6 साल तक नहीं मिला काम और लोग लिखने लगे थे नफरत भरी चिट्टियां

Posted On: 2 Aug, 2019 Bollywood में

Pratima Jaiswal

खजाना मस्तीजब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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भारत में सेलिब्रिटीज को लेकर एक अलग तरह का क्रेज देखने को मिलता है। किसी नेता, अभिनेता या किसी अन्य सेलिब्रिटी को लोग इतना चाहने लगते हैं कि उनकी हर बात उन्हें सही लगती है। खासतौर पर किसी अभिनेता या अभिनेत्री को लेकर लोग किस कदर संजीदा हो जाते हैं, कि उनकी जिंदगी के हर पहलू से उन्हें फर्क पड़ने लगता है। 26 जुलाई 1982 का दिन अमिताभ के फैंस के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। कुली की शूटिंग के दौरान पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के पेट में इतनी जोर से पड़ा कि वो जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। पूरे देश में उनके चाहने वालों ने उनके बचने की दुआएं मांगी। आखिरकार, आज के दिन 2 अगस्त को अमिताभ को नया जीवन मिला। अपने कई इंटरव्यू में अमिताभ 2 अगस्त 1982 को अपना पुर्नजन्म भी कह चुके हैं।
वहीं, दूसरी तरफ इस घटना के बाद पुनीत इस्सर सभी की नजर में विलेन बन गए थे। आइए, एक नजर डालते हैं इस पूरी घटना पर-

 

 

उस दिन ‘कुली’ के सेट पर क्या हुआ था
पुनीत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि दरअसल, फाइट सीट में उन्हें अमिताभ को घूंसा मारना था। पुनीत कराटे में 8TH डाउन ब्लैक बेल्टर थे और लंबी चौड़ी कद काठी वाले थे। फाइट चल रही थी और अमिताभ एक बोर्ड से टकराकर आगे आए, उसी वक्त पुनीत का घूंसा चला। अगर अमिताभ बोर्ड से टकराने के बाद आगे नहीं आते, तो घूंसे का वार इतना जोरदार नहीं होता। बहरहाल, उन्हें घूंसा पड़ा औऱ उनकी आंत फट गई। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अमिताभ का इलाज चला और वे मौत से जंग जीतकर लौट आए।

 

 

दुनिया के लिए विलेन बन गए थे पुनीत इस्सर
इस घटना के बाद पुनीत दुनिया के सामने विलेन बन चुके थे। उन्हें ‘मर्द’ जैसी कई फिल्मों से बाहर कर दिया गया। खुद पुनीत ने बताया था कि उन्हें करीब 6 साल तक किसी ने काम नहीं दिया। खासतौर पर उन्हें कोई विलेन का रोल देने के लिए तैयार नहीं था। लोग डरते थे कि अगर फिर कोई फाइट सीन हुआ तो न जाने क्या होगा। पुनीत के मुताबिक ज्यादातर डायरेक्टर प्रोड्यूसर को इस बात से भी डर लगता था कि उन्हें काम देने से कहीं अमिताभ नाराज न हो जाएं। इसके अलावा काफी लोग उन्हें नफरत भरी चिट्ठियां भी लिखा करते थे।

 

 

ऐसे ट्रैक पर लौटा पुनीत का कॅरियर
जब पुनीत अपने कॅरियर के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तो एक दिन अमिताभ ने ब्रीच कैंडी अस्पताल में पुनीत को बुलाया और कहा कि वो खुद को दोषी न मानें क्योंकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। उस वक्त अमिताभ के गले में पाइप लगी थी। वो ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद अमिताभ ने पुनीत को एक किस्सा सुनाया। अमिताभ ने पुनीत को बताया कि प्रकाश मेहरा की एक फिल्म में विनोद खन्ना औऱ खुद उनके बीच एक फाइट सीन था। इस सीन में अमिताभ को विनोद खन्ना की ओर एक शीशा फेंकना था। इस वक्त विनोद खन्ना को झुकना था। कई बार रिहर्सल भी हुई लेकिन जब असल में सीन शूट हुआ तो विनोद झुके ही नहीं और शीशा सीधे जाकर उनके चेहरे से टकराया। इससे विनोद खन्ना को 7-8 स्टिच लगे। इस बात के लिए अमिताभ खुद को दोषी मान रहे थे लेकिन विनोद खन्ना ने अमिताभ को हिम्मत देते हुए कहा, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी। इतना ही नहीं अमिताभ उस हालत में भी अपने बेड से उठ कर आए और पुनीत के कंधे पर हाथ रखते हुए अस्पताल के बाहर आए। ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि वहां जमा मीडिया और इंडस्ट्री के लोग देख लें कि उन्हें अमिताभ से कोई शिकायत नहीं है। बहरहाल, पुनीत ने हिंदी समेत रिजनल भाषाओं में करीब 300 फिल्में की। टीवी सीरियल महाभारत में दुर्योधन का उनका किरदार तो यादगार हो गया।…Next

 

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