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डायरेक्टर बनने के लिए राकेश रोशन ने मुंडवाया था सिर, अंडरवर्ल्‍ड की गोलियों का भी बने निशाना

Posted On: 6 Sep, 2018 Bollywood में

Shilpi Singh

खजाना मस्तीजब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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1995 में आई फिल्म ‘करण-अर्जुन’ का नाम याद आते ही वो फेमस डायलॉग “मेरे करण-अर्जुन आएंगे” न चाहते हुए भी जु़बां पर आ ही जाता है। इस खूबसूरत फिल्म को किसी और ने नहीं बल्कि ऋतिक के पिता राकेश रोशन ने निर्देशन किया है। राकेश बॉलीवुड में जानें माने निर्देशक हैं। बतौर डायरेक्टर तो उन्हें सफलता मिली लेकिन एक्टर के तौर पर वे अपनी पहचान बनाने में कामयाब नहीं रहे। ऐसे में आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी कुछ खास बातें।

 

 

राकेश के पिता भी बॉलीवुड निर्देशक थे

 

 

राकेश रोशन का जन्म 6 सितंबर 1949 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता भी बॉलीवुड निर्देशक थे। उनके छोटे भाई का नाम राजेश रोशन है, वह संगीत निर्देशक हैं। राकेश रोशन की प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, महाराष्ट्र में हुई, शादी जे ओमप्रकाश की बेटी पिंकी से।

 

बतौर एक्टर की थी करियर की शुरुआत

 

 

राकेश रोशन ने अपने करियर की शुरुआत बतौर एक्टर 1970 में फिल्म ‘घर घर की कहानी’ से की थी। इस फिल्म में वे सपोर्टिंग रोल में थे। उन्होंने बतौर एक्टर कई फिल्मों में काम किया लेकिन वे सफलता हासिल नहीं कर पाए। उन्होंने ‘मन मंदिर’ (1971), ‘पराया धन’ (1971), ‘आंखों आंखों में’ (1972), ‘खेल खेल में’ (1975), ‘खट्टा मीठा’ (1978), ‘झूठा कहीं का’ (1979), ‘खूबसूरत’ (1980), ‘तीसरी आंख’ (1982), ‘आखिर क्यों’ (1985), ‘भगवान दादा’ (1986) सहित कई फिल्मों में काम किया।

 

डायरेक्टर बनने के लिए मुंडवा सर

 

 

राकेश डायरेक्टर बनना चाहते थे मगर उन्हें एक्टिंग करने की इच्छा भी उनके मन में जागती रहती थी। इस परेशानी से तंग आ कर एक दिन उन्होंने अपना सर मुंडवा लिया और फिल्मों में एक्टिंग करने का ख़्याल मन से निकाल दिया।

 

शुरू की प्रोडक्शन कंपनी

 

 

बतौर एक्टर फिल्मों में सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने 1980 में प्रोडक्शन कंपनी ‘फिल्मक्राफ्ट’ शुरू की। उन्होंने अपने प्रोडक्शन के बैनर इसी साल ‘आप के दीवाने’ फिल्म बनाई। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरफ्लॉप हुई। इसके बाद उन्होंने 1982 में फिल्म ‘कामचोर’ बनाई जो सफल रही। उन्होंने डायरेक्शन की फील्ड में उतरने की सोची, उन्होंने 1987 में आई फिल्म ‘खुदगर्ज’ का डायरेक्शन किया। ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन किया।

 

 करण-अर्जुन रही थी सुपरहिट

 

 

एक साल बाद आई उनकी फिल्म ‘खून भरी माँग’ ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और राकेश का सिक्का बुलंद कर दिया। 1995 में उन्होंने सलमान खान और शाहरूख खान को ले कर ‘करण अर्जुन’ बनाई और इतिहास रच दिया। कहा जाता है कि राकेश बहुत अनुशासन प्रिय हैं और उन्हें जब तक परफेक्ट शॉट नहीं मिलता वे टेक पर टेक लेते रहते हैं।

 

जब राकेश रोशन को लगी गोलियां

 

 

बात 21 जनवरी, 2000 की है, राकेश रोशन को तिलक रोड स्थित उनके ऑफिस के बाहर दो शूटर ने गोली मार दी थी। एक गोली उनके गंधे पर और दूसरी उनकी छाती पर लगी थी। हालांकि, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जान बचा ली गई। ये गोलियां राकेश को मारने के लिए नहीं बल्कि उन्हें धमकाने के लिए मारी गई थी। उन्हें धमकी दी गई थी कि वे अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ के प्रॉफिट में से हिस्सा दें।…Next

 

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