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अजय देवगन 'आक्रोश' में नास्तिक बने तो इस अभिनेता ने उन्‍हें सही रास्‍ता दिखाया, अजय की कहानी सुन शॉक्‍ड हो गए थे अक्षय खन्‍ना

Posted On: 4 Oct, 2019 Bollywood में

Rizwan Noor Khan

खजाना मस्तीजब हों अकेले और उदास कर लें थोड़ी मस्ती से मुलाकात

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दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं। वहीं, कई लोग ऐसे भी हैं जो धर्म को पहले मानते थे बाद में नास्तिक बन गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह भी खुद को नास्तिक मानते थे। वह कहते थे उन्‍हें किसी भी धर्म से लगाव नहीं है। इसी तरह बॉलीवुड में भी कुछ बार ऐसी घटनाएं हुईं जब अभिनेता या अभिनेत्री नास्तिक बनने की कगार पर पहुंच गए। कई फिल्‍मों में भी नास्तिक होने की कहानियों को दिखाया गया और इनमें अभिनेताओं ने नास्तिक होने के किरदारों को निभाया है।

 

 

ऑनर किलिंग और एक समुदाय के लोगों के सत्‍ता पर काबिज होने और गरीबों को दबाने की कहानी को फिल्‍म आक्रोश में दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्‍म में अजय देवगन और अक्षय खन्‍ना सीबीआई अफसर की की भूमिका में हैं। अजय देवगन दलित जाति से हैं। यह कहानी 2010 में आई प्रियदर्शन की इस फिल्‍म आक्रोश की है। फिल्‍म में समाज के ऊंचे तबके के लोगों द्वारा निचले तबके के लोगों को दबाए रखने को उजागर किया गया है। फिल्‍म में धर्म के नाम के गलत इस्‍तेमाल को भी रेखांकित किया गया है।

 

फिल्‍म में एक सीन आता है जब सीबीआई अफसर बने अक्षय खन्‍ना अपने जांच में सहयोग देने वाले अजय देवगन से पूछते हैं कि तुम भगवान को मानते हो। इस पर अजय देवगन इनकार करते हैं और नहीं में सिर हिलाते हैं। इससे पहले अजय देवगन अक्षय खन्‍ना को एक कहानी सुनाते हैं। कहानी के मुताबिक अजय देवगन कहते हैं कि एक शिवरामपुर गांव है। जहां एक दलित परिवार रहता था। उस परिवार में मां बाप दो बेटियां और एक बेटा था। दलित ने पाई पाई जोड़कर एक खेत खरीदा और फसल पैदाकर कमाए रुपयों से दो गाय खरीदीं।

 

 

अजय देवगन कहानी सुनाते हुए आगे कहते हैं कि दलित ने गायों का नाम भी रखा गंगा और जमुना। सब ठीक चल रहा था। एक दिन गांव में दलित के घर के पास से ठाकुर गुजरा और वह मजाक में बोला ऐ दलित गजब तरक्‍की कर लिए हो। कहीं हम जैसे जमींदार तो नहीं बनना चाहते हो। तो दलित भी मजाक में बोला हम कितनी भी मेहनत क्‍यों न कर लें, लेकिन दलित से ठाकुर नहीं बन सकते हैं। हां अगर भगवान ने चाहा तो बच्‍चे पढ़ लिखकर ठाकुर से ज्‍यादा बेहतर जिंदगी गुजर बसर करेंगे।

 

कहानी सुना रहे अजय देवगन आगे कहते हैं कि दलित का यह मजाक ठाकुर के अहम पर चोट कर गया। ठाकुर को यह मजाक थप्‍पड़ से थोड़ा ज्‍यादा लगा। जन्‍माष्‍टमी के मेले से जब परिवार लौटा तो देखा कि घर, खेत और गाय सब जला दिए गए। अगली सुबह वह दलित अपने पूरे परिवार के लिए मिठाई लेकर आया और कहा कि फिक्र मत करो सब ठीक हो जाएगा। और फिर सब ठीक हो ही गया, क्‍योंकि उस दलित ने मिठाई में जहर मिला दिया था। सब मर गए, लेकिन जैसे तैसे वह लड़का बच गया।

 

 

इसके बाद अजय देवगन अक्षय खन्‍ना से आगे कहते हैं कि इस इलाके में ऐसी कहानियां हर रोज सुनने को मिलती हैं। कहानी सुनकर अचंभित हो चुके अक्षय खन्‍ना अजय देवगन से पूछते हैं कि आजकल वह लड़का क्‍या करता है। इस पर अजय देवगन बताते हैं कि वह लड़का कोई और नहीं वह खुद हैं। यह सुनकर अक्षय खन्‍ना पहले से ज्‍यादा अचंभित और चकित हो जाते हैं। बाद में जब अजय देवगन अक्षय खन्‍ना से कहते हैं कि वह भगवान को नहीं मानते हैं तो अक्षय उन्‍हें सही रास्‍ता दिखाने की कोशिश करते हैं।…Next

 

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