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जब अमिताभ के पैर छूने लगे अक्षय कुमार, जानें तब बिग बी ने दिया कैसा ‘रिएक्‍शन’

Posted On: 30 Nov, 2017 Bollywood में

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कैमरे में कभी-कभी ऐसे पल कैद हो जाते हैं, जिन्‍हें हर कोई देखना चाहता है। कुछ ऐसा ही गोवा में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के आखिरी दिन हुआ। महोत्‍सव का समापन मंगलवार को हुआ। अंतिम दिन बॉलीवुड की कई नामी हस्‍त‍ियों ने इसमें शिरकत की। इस दौरान एक ओर जहां महोत्‍सव में ग्‍लैमर का तड़का लगा, वहीं दूसरी ओर कुछ भावुक करने वाले पल भी देखने को मिले। एक ऐसा ही वाकया अमिताभ बच्‍चन और अक्षय कुमार के बीच देखने को मिला। महोत्‍सव को समाप्‍त हुए दो दिन हो गए, लेकिन सोशल मीडिया पर यह भावुक पल काफी वायरल हो रहा है। आइये आपको बताते हैं कि क्‍या है पूरा मामला।


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अमिताभ को दिया गया सम्‍मान


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अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 48वें संस्करण में अमिताभ बच्‍चन को ‘इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर’ के सम्‍मान से नवाजा गया। अमिताभ बच्चन को यह अवॉर्ड केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और अभिनेता अक्षय कुमार ने दिया। इसी दौरान कैमरे में एक भावुक पल कैद हो गया। दरअसल, अवॉर्ड के लिए जैसे ही स्टेज पर अमिताभ बच्‍चन को बुलाया गया, तो अक्षय कुमार उन्हें लेने के लिए आगे बढ़े। बिग बी जैसे ही अपनी सीट से उठे, वैसे ही अक्षय कुमार ने उनके पैर छुए। अक्षय के पैर छूने पर अमिताभ ने उन्‍हें गले से लगा लिया।


कैमरे में कैद हुआ भावुक पल


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इस पल को कैमरे में कैद कर लिया गया। इसके बाद बिग बी और अक्षय की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। अमिताभ के लिए अक्षय कुमार के इस सम्‍मान की ट्विटर यूजर्स ने खूब तारीफ की। बिग बी ने भी स्‍नेह के साथ एक यूजर के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए लिखा, ‘शर्मिंदा हूं कि अक्षय ने ऐसा किया… नहीं अक्षय को ऐसा नहीं करना चाहिए था।’ इसके अलावा अमिताभ बच्‍चन ने ट्विटर पर IFFI के समापन समारोह की कई फोटो शेयर की हैं। साथ ही उन्‍होंने स्‍मृति ईरानी, अक्षय कुमार और करण जौहर का धन्यवाद भी किया है।


सिनेमा की ताकत का किया उल्‍लेख


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वहीं, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के समापन समारोह में बिग बी ने जाति, वर्ण, नस्ल या धर्म से इतर लोगों को साथ लाने की सिनेमा की ताकत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिनेमा एकमात्र ऐसा माध्यम है, जहां सिर्फ तीन घंटे में ‘आदर्श न्याय’ मिलता है। इस फिल्म उद्योग का हिस्सा होकर मैं गौरवान्वित महसूस करता हूं। साथ ही कहा कि जब हम अंधेरे कमरे में बैठते हैं, तो हम अपने साथ बैठे व्यक्ति की नस्ल, वर्ण या धर्म नहीं पूछते। हम समान रूप से फिल्म देखते हैं और समान चुटकुलों पर हंसते हैं। हम समान भावना पर रोते हैं और समान गाने गाते हैं। आज के दौर में इस तरह की एकता और एकीकरण की मिसाल कहां पाते हैं, जो हमें सिनेमा की दुनिया में देखने को मिलती है…Next


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