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[FIFA WORLD CUP] “स्पेन का अचूक वार ”

Posted On: 8 Jul, 2010 Others में

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दक्षिण अफ़्रीका डरबन का मॉसेस मभीडा स्टेडियम, फीफा विश्व कप 2010 दक्षिण अफ़्रीका का सेमीफाइनल मैच, जो खेला जा रहा था तीन बार की फुटबॉल विश्व कप विजेता जर्मनी और पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनने वाली स्पेन के साथ. स्टेडियम में मौजूद 60 हज़ार से भी ज़्यादा दर्शक और टेलिविज़न या फिर इंटरनेट के द्वारा देख रहे अरबों के फुटबॉल प्रेमी यह जानने के लिए बेताब थे कि 27 दिनों के महासंग्राम के बाद वह कौन से टीम होगी जो नीदरलैंड के साथ 11 जून को जोहांसबर्ग के सॉकर सिटी स्टेडियम में होने वाले ऐतिहासिक फाइनल में शिरकत करेगी.


1इसमें कोई संदेह नहीं था कि जर्मनी अभी तक इस विश्व कप की सबसे अच्छी टीम रही थी. नाकआउट दौर में पहले इंग्लैंड को और फिर मैसी की अर्जेंटीना को बाहर का रास्ता दिखने वाली जर्मनी की इस युवा टीम ने अभी तक सबसे ज़्यादा गोल ठोंके थे. चाहे हम जर्मनी की रक्षापंक्ति की बात करें या फिर उसके स्ट्राइकर और मिड फिल्डर की, सभी ने जर्मन कप्तान फिलिप लाह्म के नेतृत्व में हर क्षेत्र में बाज़ी मारी थी. 2006 फीफा विश्व कप में गोल्डन बूट पाने वाले जर्मनी के स्ट्राइकर मिरोस्लैव क्लोस इस बार भी पांच गोल के साथ स्पेन के डेविड विला और नीदरलैंड के वेस्ले स्नीजदर के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर चल रहे थे. क्लोसे का बखूबी साथ लुकास पोडोल्की और थॉमस मूलर ने दिया था. मिड फिल्ड में बास्टियन स्क्वींस्टीगर के नेतृत्व में मेसुट ओजिल और सैमी खेदिरा ने विपक्षियों की नाक में अपने काउंटर अटैक से दम कर रखा था. लेकिन एक बात जो जर्मनी के खिलाफ़ हुई थी वह था इस विश्व में चार गोल मरने वाले थॉमस मूलर का सेमीफाइनल मैच के लिए प्रतिबंध झेलना और इसके कारण उनके काउंटर अटैक कि नीति पर एक सवालिया निशान भी था?


2स्पेन भले ही फीफा विश्व कप रैंकिंग में दूसरे नंबर पर है परन्तु अगर हम उनके प्लेयर बे बारे में जानें तो सभी अपने में मैच विनर हैं. 2006 फीफा फुटबॉल विश्व कप के बाद अब तक सभी टीमों के मुकाबले में स्पेन का फॉर्म सबसे अच्छा रहा है. पिछले चार वर्षों में उन्होंने कुल मिलाकर 53 मैच खेले जिसमें से 48 उन्होंने जीते और केवल पांच में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. जिसमें से दो हार उन्हें दक्षिण अफ़्रीका की ज़मीन पर मिली थी और इनमें से एक हार तो उन्हें इस बार के विश्व कप के अपने पहले मुकाबले में स्विट्ज़रलैंड के हाथों मिली थी. शायद स्विट्ज़रलैंड के हाथों पराजित होना स्पेन के लिए संकेत था (अभी संभल जाओ वरना टाटा). स्पेन के खेल को अगर आप देखें तो पता चलता है कि भले ही स्पेन यूरोपीय टीम हो परन्तु वह खेल दक्षिण अमेरिकी पद्धति से खेलती है. छोटे-छोटे पास स्पेन के खेल की विशेषता है. इस विश्व कप में स्पेन का सबसे बड़ा हथियार डेविड विला थे जिन्होंने स्पेन के द्वारा किए गए सात गोलों में से पांच गोल किए थे. स्पेन की सिरदर्दी का कारण उनके स्टार खिलाड़ी फर्नांडो टारेस जो इस विश्व कप में पूरे फ्लाप रहे थे और जिन्होंने अभी तक अपनी गिनती भी नहीं शुरू की थी और इसी कारणवश आज मैच में उन्हें बेंच पर बैठाया गया.


किसका रहा ज़ोर


मैच शुरू होने के दस मिनट पश्चात तक दोनों टीमों ने संभलकर खेला और ज़्यादा से ज़्यादा गेंद अपने पास रखने का प्रयत्न किया. 12वें मिनट में स्पेन को पहले कार्नर मिला जिसमें बार्सिलोना और स्पेन के सेंट्रल डिफेंडर पुयोल गल ने हेड तो लगाया परन्तु फुटबॉल गोल पोस्ट से ऊपर गयी. उसके बाद शुरू हुआ चूहे और बिल्ली का खेल. स्पेन के खिलाड़ियों को देख ऐसा लग रहा था जैसे मैदान में स्पेन के 15 खिलाड़ी खेल रहे हों. हर जगह स्पेन के खिलाड़ी दिख रहे थे जर्मन खिलाड़ी तो सिर्फ गेंद के पीछे भागते दिख रहे थे. जर्मन स्ट्राइकर क्लोस के पास तो गेंद पहुंच ही नहीं पा रही थी लेकिन इन सब में जर्मनी की रक्षापंक्ति के दाद देते हैं जिन्होंने स्पेन के हर वार को सफलता से विफल कर दिया. लेकिन इसके बीच जर्मनी ने कुछ मूव भी बनाए और स्पेन के गोलकीपर इकेर कासिलस को मेहनत भी कराई परन्तु गोल करने में दोनों टीमें विफल रहीं. पहले हाफ के खत्म होते होते-होते स्पेन के स्ट्राइकर पेड्रो ने करारी शॉट लगाई परन्तु गोल करने में वह भी नाकामयाब रहे.


दूसरा हाफ पहले हाफ की तरफ़ नहीं रहा. अब जर्मन खिलाड़ी चढ़ कर खेल रहे थे और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गोल अब हुआ तब हुआ. लेकिन स्पेन के खिलाड़ी भी जानते थे अगर जर्मनी ने गोल कर दिया तो उसे उतारना बड़ा मुश्किल है. एक खिलाड़ी जिसका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा वह था स्पेन का डिफेंडर जेरार्ड पीक्यूज जो हर जगह मौजूद थे और जिन्होंने जर्मनी के हर मंसूबों को नाकामयाब किया. लेकिन शुरुवाती हमलों के बाद एक बार फिर स्पेन के मिड फिल्डर ने खेल अपनी तरह से खेलना शुरू किया. बार्सिलोना के खिलाड़ी एंड्रेस इनिएस्ता और जावी ने छोटे छोटे पासों से खेल स्पेन के नियंत्रण में रखा. 73वें मिनट में स्पेन को कार्नर मिला और इस बार पुयोल ने कोई गलती नहीं की और शानदार हेड लगा गोल कर स्पेन को बढ़त दिला दी. आंकड़े गवाह थे कि इस विश्व कप में स्पेन ने जब-जब बढ़त बनायी है तब-तब उन्होंने मैच जीता है.


3एक गोल से पिछड़ने के बाद जर्मन जागे और बराबरी में आने का एक मौका ढूँढने लगे. लेकिन स्पेन की टीम हार मानने वाली नहीं थी. एक-एक कर घड़ी की सूइयां समय समाप्ति की तरफ़ बढ़ रही थीं लेकिन गोल कहीं से नहीं आ रहा था. गोल की तलाश में जर्मनी ने मारियो गोम्जी को मैदान में उतारा और तभी स्पेन ने फर्नांडो डेविड विला की जगह टारेस को उतारा. 85वें मिनट में स्पेन को मैच जीतने का एक और मौका मिला जब पेड्रो को गेंद मिली लेकिन हीरो बनने की चाह में पेड्रो ने फर्नांडो टारेस को फुटबॉल पास नहीं की और तभी जर्मनी ने उनसे गेंद छीन ली. अगर उस समय वह फुटबॉल टारेस को पास कर देते तो शायद टारेस भी अपना खाता खोल पाते. आखिरी के मिनटों में स्पेन ने गेंद को अपने कब्ज़े से जाने नहीं दी और सभी जर्मन फुटबॉल प्रेमियों का दिल तोड़ फाइनल में पहली बार कदम रख इतिहास रच दिया और साथ ही साथ यह भी तय कर दिया कि इस बार फीफा फुटबॉल विश्व कप की विजेता एक नयी टीम होगी चाहे वह स्पेन होगी या फिर नीदरलैंड होगी.


This blog is about the second semi final match played between thrice FIFA football World Champion Germany and the 2008 Euro Champion Spain in 2010 FIFA Football World Cup at South Africa. Till the semifinal undoubtedly Germany was the best team of the whole tournament. On the other side Spain the number two ranked team by FIFA was running high on confident after their four consecutive win in the FIFA World Cup. The match was played in high tempo and was mostly dominated by Spain’s Midfield players but neither team was able to break the deadlock in the first half. In the second half Barcelona and Spain’s Central Defender Carlos Puyol scored from a brilliant header to give Spain a 1-0 lead that’s lasted till the end and for the first time Spain entered the FIFA Football World Cup Finals.

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