blogid : 14028 postid : 608061

फितरत

Posted On: 22 Sep, 2013 Others में

वंदे मातरम्''न मैं कवी हूँ न कवितायें , मुझे अब रास आती हैं , मैं इनसे दूर जाता हूँ , ये मेरे पास आती हैं, हज़ारों चाहने वाले, खड़े हैं इनकी राहों में, मगर कुछ ख़ास मुझमें है , ये मेरे साथ आती हैं।''

अभिषेक

101 Posts

238 Comments

हम जीते हैं,
झूठे ख्वाबों के सहारे
जिन्दगी,
न कोई रास्ता
न कोई मंजिल
भटकना है,
अनजान राहों पर,
बसाना चाहते हैं,
इक नयी
दुनिया,
अपने
वजूद को मिटाकर ,
नफरत , धोका, फरेब,
घुटन सी होती है,
दुनिया को देखकर,
न वफ़ा ,
न सच्चाई,
हर तरफ,
नफरत, नफरत,
सिर्फ नफरत,
हैवानियत के आलम में,
पहचान खोती,
इंसानियत,
किश्तों में
दम तोड़ी ख्वाहिशें ,
अजीब सी बेचैनी,
जिन्दगी से
नफरत,
पर
बेपनाह मोहब्बत,
सुकून की तलाश,
पर मिलती ,
सिर्फ कशमकश,
कुछ होना

होने के जैसा है,
कैसी जिन्दगी है,
हम इंसानों की?

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग