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यूपीए के तीन साल – प्रगतिशील सरकार या चौतरफा हाहाकार ?

Posted On: 28 May, 2012 Others में

जागरण जंक्शन फोरमदेश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

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हाल ही में यूपीए 2 ने बड़े जोश और उत्साह के साथ अपनी तीसरी सालगिरह का जश्न मनाया है। लेकिन उनके जश्न मनाने की कीमत हर बार की तरह जनता को ही चुकानी पड़ी। आज जब देश रुपए की गिरावट जैसी बड़ी और चिंतनीय समस्या से जूझ रहा है तो ऐसे में पेट्रोल के दामों में इतनी भारी बढ़ोत्तरी क्या सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाती?


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपए की कीमत गिरने के बाद अब केंद्रीय सरकार ने जनता के ऊपर पेट्रोल के बढ़े दामों का भी बोझ डाल दिया है। इस मसले पर सरकार का यह कहना है कि ना तो रुपए की कीमत को बढ़ाना या घटाना उनके हाथ में है और ना ही पेट्रोल के दामों में वृद्धि के लिए वो जिम्मेदार हैं। पेट्रोल का बाजार विनियंत्रित है, इसीलिए बढ़ी हुई कीमतों के लिए सरकार नहीं बल्कि पेट्रोल सप्लाई करने वाली कंपनियां जिम्मेदार हैं। इस मसले पर सरकार के हाथ पूरी तरह बंधे हुए हैं। रही बात महंगाई की तो उससे सिर्फ भारत की जनता ही नहीं विश्व के अन्य देश भी प्रभावित हुए हैं। खाद्य पदार्थों या अन्य चीजों के मूल्य में वृद्धि होना अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का परिणाम है।


तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में जारी अपनी रिपोर्ट कार्ड में सरकार ने तो अपनी उपलब्धियां गिनवा दी लेकिन आम जनता उनके दावों से इत्तेफाक नहीं रख पा रही है। सरकार की इच्छाशक्ति पर संदेह करने वाले लोगों का यह साफ कहना है कि यूपीए सरकार अपने कार्यकाल में पूरी तरह असफल साबित हो चुकी है। दिनोंदिन बढ़ती महंगाई और खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी की मार झेल रही जनता को अब पेट्रोल की कीमतों में हुई भारी वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है और इन सब के लिए केवल केंद्रीय सरकार ही जिम्मेदार है। आम जनता और विपक्ष के साथ-साथ बुद्धिजीवी वर्ग से संबंध रखने वाले बहुत से लोगों का यही कहना है कि यूपीए सरकार को वे ऐसी सरकार का दर्जा दे रहे हैं तो हर क्षेत्र में असफल साबित हो रही है। कांग्रेस के कार्यकाल में महंगाई के साथ-साथ भ्रष्टाचार में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है जो स्वत: ही सरकार के दावों की पोल खोलता है। बहुत से लोगों का तो यह भी कहना है कि केंद्रीय सरकार अब बाजार के हाथों बिक गई है और जनता को उसकी नियति पर छोड़ दिया गया है।


उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर हमारे सामने कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या आपको लगता है कि वाकई कांग्रेस सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है या फिर वह सच में बाजार के हाथों बिक गई है


2. जब भारत को अधिकांश पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करना होता है तो ऐसे में कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी के लिए सरकार को किस हद तक दोषी ठहराया जा सकता है?


3. तमाम असफलताओं के बीच अपने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाली यूपीए सरकार ने कौन-कौन सी उपलब्धियां हासिल की हैं?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


यूपीए के तीन साल – प्रगतिशील सरकार या चौतरफा हाहाकार ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “यूपीए सरकार” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व यूपीए सरकार – Jagran Junction Forum लिख कर जारी क


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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