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जनमत को प्रभावित करता है चुनाव पूर्व सर्वेक्षण?

Posted On: 21 Oct, 2013 Others में

जागरण जंक्शन फोरमदेश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

Jagran Junction Forum

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आगामी महीनों में भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और जीत-हार का सर्वे करवाने का दौर भी शुरू हो गया है। गत दिनों आम आदमी पार्टी ने स्वयं एक सर्वे करवाया था और कथित तौर पर उन नतीजों के अनुसार इस बार दिल्ली जैसे राज्य में ‘आप’ ही बाजी मारेगी। ऐसे ही प्रत्येक राजनीतिक दल अपने द्वारा करवाए गए सर्वे को पुख्ता करार देता है और अन्य राजनीतिक दलों की सैंपलिंग पर प्रश्न चिह्न लगाता है। इसके पीछे उनका मत यह होता है कि उनके सर्वे पूरी तरह प्रामाणिक होते हैं जबकि दूसरे दल जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए ऐसे भ्रामक सर्वे करते हैं।


इस बात में कोई दोराय नहीं है कि आज की तारीख में मीडिया चैनल भी राजनीतिक दल उन्मुख रहते हैं। जिन-जिन दलों से वे संबंधित होते हैं, उन-उन दलों की ही वे वाहवाही करते हैं। ऐसे में यह एक बहस का मुद्दा बन गया है कि ‘अपना-अपना सर्वे और अपनी-अपनी सरकार’ का यह बढ़ता चलन आमजन को किस तरह प्रभावित करने वाला सिद्ध होगा।


बुद्धिजीवियों का एक वर्ग यह कहता है कि ऐसे सर्वे कर राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता बरकरार नहीं रख पाते। अपने-अपने सर्वेक्षणों का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होता है कि जनता खुद ही इस दुविधा में पड़ जाती है कि किसके जीतने की संभावना सबसे अधिक है और वह किसे अपना वोट दे। इस सब परेशानियों के चलते वोटर अपने मत का सही उपयोग नहीं कर पाते। इस वर्ग के लोगों का कहना है कि अपनी प्रशंसा करने के चक्कर में वह अपना नुकसान ही कर लेते हैं।


वहीं दूसरी ओर वे लोग हैं जिनका कहना है कि भारत की जनता को 66 वर्षों का अनुभव है और ऐसे सर्वे से वह अपना मत ना तो बदलती है और ना ही किसी तरह की दुविधा में फंसकर गलत प्रत्याशी को वोट देती है। ऐसे सर्वे सच हों या झूठ, जनता को कभी इस बात से अंतर नहीं पड़ता और ना ही किसी तरह की कोई समस्या होती है।


ऐसे हालातों में कुछ सवाल हमारे सामने उपस्थित हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. मीडिया चैनलों की सहायता से ऐसे भ्रामक सर्वे करवाकर क्या राजनीतिक दल अपनी विश्वसनीयता पर खतरा पैदा करते हैं?

2. क्या जनता ऐसे सर्वेक्षणों के नतीजों में उलझकर अपने मत का सही प्रयोग नहीं कर पाती?

3. क्या वाकई जनता इतनी समझदार है जो चुनाव के समय अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दे सके?

4. क्या चुनाव पूर्व ऐसे किसी भी तरह के सर्वेक्षण पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए?



जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


जनमत को प्रभावित करता है चुनाव पूर्व सर्वेक्षण?



आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “सर्वे का सच ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व सर्वे का सच– Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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