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जिस्मानी रिश्तों के लिए क्या ज्यादा जरूरी – समाज की अनुमति या निजी रजामंदी?

Posted On: 3 Sep, 2012 Others में

जागरण जंक्शन फोरमदेश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

Jagran Junction Forum

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पाश्चात्य देशों की तरह भारत में भी गर्भनिरोधक और कॉंट्रासेप्टिव पिल्स का बाजार दिनोंदिन गर्माता जा रहा है। युवाओं के बीच ऐसी दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता उनके जीवन में आते खुलेपन की ओर इशारा करती है। विवाह पूर्व शारीरिक संबंध बनाना आज के युवाओं के दृष्टिकोण में कोई सामाजिक निषेध नहीं बल्कि व्यक्तिगत रजामंदी बन गया है। सेक्स जिसे कुछ समय पहले तक सामूहिक वार्तालाप में भी शामिल नहीं किया जाता था आज उसे धड़ल्ले के साथ प्रचारित किया जा रहा है। हाल ही में मुंबई की एक फार्मा कंपनी ने ‘18 अगेन’ नामक एक ऐसी क्रीम को बाजार में उतारा है जिसकी सहायता से महिलाएं अपना खोया कौमार्य वापिस पा सकती हैं। हालांकि इससे पहले भी सर्जरी की मदद से महिलाएं एक बार फिर से खुद को वर्जिन महसूस कर पाती थीं लेकिन यह सर्जरी भारत समेत अन्य एशियाई देशों के लोगों के लिए महंगी साबित होती थी। ऐसे में 18 अगेन क्रीम, जिसका उपयोग बड़ी सहजता और सुलभता के साथ किया जा सकता है, का भारतीय समाज में प्रवेश करना अपने आप में बहस का मुद्दा बन गया है कि क्या भारतीय समाज में संबंधों की गरिमा और उनका महत्व घटता जा रहा है?


व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उनके अधिकारों की पैरवी करने वाले लोगों का कहना है कि एक वयस्क व्यक्ति किससे और कब शारीरिक संबंध बनाता है यह उसकी अपनी मर्जी और सोच होनी चाहिए। यह पूरी तरह व्यक्तिगत मसला है जिसमें समाज या फिर किसी भी अन्य व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। व्यक्तिवाद का पक्ष लेने वाले लोगों का यह साफ कहना है कि आधुनिकता के निरंतर बढ़ते प्रचार-प्रसार के बाद भी अगर हम व्यक्ति के जीवन पर इस प्रकार पहरे लगाते रहेंगे तो यह वैयक्तिक रूप से बेहद निराशाजनक साबित होगा। आज की पीढ़ी की जीवनशैली काफी खुलापन लिए हुए हैं ऐसे में सेक्स को परंपरा से जोड़कर देखना हैरानी भरा कदम ही कहा जाएगा क्योंकि इसका संबंध संस्कृति से नहीं बल्कि व्यक्ति की अपनी मर्जी और उसके अपने निजी विचारों से है। उनके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती करना या संस्कृति के नाम पर उनके आपसी संबंधों को बाधित करना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है। कोई दो व्यक्ति अपने संबंध को आगे बढ़ाने के लिए शारीरिक रूप से नजदीक आते हैं तो यह उनकी अपनी सोच है इसमें समाज की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। कई बार प्रेम संबंध सभी सीमाएं पार करने के बाद भी सफल नहीं हो पाता तो आगे का जीवन बिना किसी परेशानी के बिताने के लिए अगर महिलाएं 18 अगेन या ऐसी कोई अन्य क्रीमों का उपयोग करती हैं तो इसके बुराई भी क्या है।


वहीं दूसरी ओर गर्भनिरोधक गोलियों और 18 अगेन जैसी क्रीमों की भारत में बढ़ती लोकप्रियता को सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेहद घातक समझने वाले लोगों का मत है कि अगर हर कोई व्यक्तिगत विचारों और मर्जी को ही प्राथमिकता देगा तो इससे सामुदायिक एकता और सामाजिक गरिमा को नुकसान पहुंचेगा। भारत में विवाह पूर्व शारीरिक संबंध हमेशा से ही निषेध हैं और रहेंगे। अगर किसी व्यक्ति की गतिविधियां सामाजिक गरिमा पर पर प्रहार करती हैं तो इसे किसी भी रूप में सहन नहीं किया जा सकता। गर्भनिरोधक गोलियों और कौमार्य वापिस दिलवाने वाली क्रीमों की बढ़ती मांग भारतीयों के गिरते नैतिक स्तर को दर्शाती है जो हमारी संस्कृति को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। टी.वी. पर आने वाले इनसे संबंधित विज्ञापन को देखकर युवा पीढ़ी भटक रही है और अगर इस बढ़ते प्रचलन को रोका नहीं गया तो वो दिन दूर नहीं जब पाश्चात्य देशों की भांति भारत में भी लोग बिना किसी शर्म और लिहाज के सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के साथ शारीरिक निकटता बनाते नजर आएंगे।


शारीरिक संबंधों के क्षेत्र में आने वाले खुलेपन और भारतीय समाज में बाजारों में गर्भनिरोधक गोलियों या 18 अगेन जैसी क्रीमों के औचित्य पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उठते हैं, जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. क्या परंपरा और संस्कृति के बहाने हम वाकई अपनी युवा पीढ़ी की अपेक्षाओं का दमन कर रहे हैं?

2. क्या अब समय आ गया है कि भारतीय समाज अपनी रूढिवादी छवि को त्याग कर एक आधुनिक देश का उदाहरण पेश करे?

3. क्या आधुनिक और खुले विचारों का देश कहलाने का एकमात्र तरीका अपनी शालीनता और सभ्यता को छोड़कर पाश्चात्य लोगों की तरह बर्ताव करना है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


जिस्मानी रिश्तों के लिए क्या ज्यादा जरूरी – समाज की अनुमति या निजी रजामंदी?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “समाज की अनुमति” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व समाज की अनुमति – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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