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छोटे राज्यों की प्रासंगिकता ?

Posted On: 28 Nov, 2011 Others में

जागरण जंक्शन फोरमदेश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

Jagran Junction Forum

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उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और मुख्यमंत्री मायावती ने विकास और जनभावनाओं का हवाला देते हुए राज्य को बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश, अवध और पूर्वांचल में बांटने संबंधी प्रस्ताव 21 नवंबर को विधानसभा में पारित करा लिया। इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराया किंतु आखिरकार सत्ता पक्ष की जीत हुई। सत्त्ता पक्ष के इस कदम से देश में छोटे राज्यों की प्रासंगिकता पर एक बार फिर से जोरदार बहस छिड़ गई है।


भारत में संविधान के प्रवर्तन काल से ही राज्यों के बंटवारे और छोटे राज्यों की प्रासंगिकता पर तमाम बहस होती रही है। छोटे राज्य की पैरवी करने वाले कहते हैं कि इससे विकास और प्रशासन में सहूलियत मिलेगी। राज्य छोटा होने के कारण पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन संचालन हो सकेगा तथा राजस्व का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही क्षेत्र की जनता की भावनाओं का ख्याल रखते हुए उनकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा किया जा सकेगा।


वहीं दूसरी ओर छोटे राज्यों के अस्तित्व के विरोधी इसे देश की एकता-अखंडता और प्रशासन की दृष्टि से खतरनाक बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग करते रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है विभाजन की ये प्रवृत्ति विनाशकारी है और इससे भविष्य में भी ऐसी मांगें उठती रहेंगी जिनका कोई औचित्य नहीं होगा। छोटे राज्यों के आलोचक कहते हैं इससे देश की आर्थिक व्यवस्था भी चौपट होगी क्योंकि अनेक छोटे राज्यों के उदय से उतने ही विधान मंडल और अन्य प्रशासनिक संस्थाओं की स्थापना करनी होगी साथ ही भ्रष्टाचार की भी भारी गुंजाइश हो जाएगी।


छोटे राज्यों के पक्ष और विपक्ष में अनेक मत-मतांतरों को देखते हुए कुछ बेहद गंभीर और सामयिक प्रश्न उठ खड़े होते हैं, जैसे:


1. क्या राज्य छोटा होने से त्वरित विकास और पारदर्शी प्रशासन की गारंटी ली जा सकती है?

2. कहीं छोटे राज्यों की मांग के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य तो नहीं है?

3. क्या छोटे राज्यों की मांग एक विभाजनकारी प्रवृत्ति है?

4. छोटे राज्यों की कितनी प्रासंगिकता है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


छोटे राज्यों की प्रासंगिकता ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हों तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “छोटे राज्यों की प्रासंगिकता” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व छोटे राज्यों की प्रासंगिकता Jagran Junction Forum लिख कर जारी करें।

2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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