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कौन बनेगा काशी का सरताज - मोदी या केजरीवाल?

Posted On: 18 Mar, 2014 Others में

जागरण जंक्शन फोरमदेश-दुनियां को प्रभावित करने वाले ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर जनता की राय को आवाज देता ब्लॉग

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भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए कई दल लामबंद हो रहे हैं। उनका मकसद है ‘कैसे भी करके नरेंद्र मोदी को वाराणसी सीट हराना’। कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को वाराणसी में मोदी को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आरजेडी और कांग्रेस का साथ मिल सकता है। एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि मोदी को रोकने के लिए उनकी पार्टी केजरीवाल का समर्थन कर सकती है। वहीं कांग्रेस नेता अनिल शास्‍त्री ने भी तुरंत साझा उम्‍मीदवार उतारने की वकालत कर दी।


हालांकि अभी ‘आप’ ने वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता अरविंद केजरीवाल का नाम आगे किया जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़े यह सभी पार्टियां मोदी की बढ़ती ताकत को रोकने में सफल हो पाएंगी?


जानकारों का एक वर्ग यह मानता है कि उम्मीदवार के तौर पर अगर वाराणसी सीट से अरविंद केजरीवाल को उतारा जाए और सभी पार्टियां उनका समर्थन कर देती हैं तो मुमकिन है कि केजरीवाल मोदी को हरा भी दें। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता और वाराणसी के वर्तमान सांसद मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ स्थानीय लोगों की नाराजगी भी उन्हें फायदा पहुंचा सकती है। इसका कहीं ना कहीं भाजपा में भी डर है। इसलिए भाजपा के नेता मोदी को वाराणसी सीट के साथ-साथ गुजरात से भी उतारने के फिराक में हैं।


जहां एक धड़ा नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बेताब दिख रहा है। वहीं राजनीति के कुछ जानकार इसे इतना आसान नहीं मानते। उनका मानना है कि वाराणसी हमेशा से ही भाजपा का गढ़ रहा है। यदि वहां से भाजपा का कोई भी उम्मीदवार खड़ा होता है तो उसकी जीत पक्की मानी जाती है। अबकी बार देश के सबसे लोकप्रिय नेता मोदी को भाजपा ने वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित किया है, ऐसे में अरविंद को उन्हें हराना इतना आसान नहीं होगा। अगर अरविंद मोदी को शीला दीक्षित समझ रहे हैं तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है। कांग्रेस के पूर्व नेता जगदंबिका पाल का कहना है कि ऐसे ‘धरतीपकड़ पहलवान’ (केजरीवाल) पहले भी ताल ठोंकते रहे हैं, मोदी को मात देना कोई मजाक नहीं है।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. खुद को धर्मनिरपेक्ष मानने वाली पार्टियां क्या मोदी के बढ़ते कदम को वाराणसी में ही रोक देंगी?

2. क्या आम आदमी पार्टी को विश्वास हो चुका है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में शीला दीक्षित की तरह वाराणसी में मोदी को पटकनी दे पाएंगे?

3. क्या भाजपा को भी डर है कि मोदी अगर वाराणसी से चुनाव नहीं जीते तो पार्टी को काफी नुकसान होगा?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


कौन बनेगा काशी का सरताज – मोदी या केजरीवाल?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “कौन बनेगा काशी का सरताज”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “कौन बनेगा काशी का सरताज” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।

2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।

3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

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