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भ्रम —

Posted On: 3 Mar, 2018 Others में

भोर की प्रतीक्षा में ...कविताएँ एवं लेख

Nirmala Singh Gaur

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सरोवर को समुन्दर समझने का भ्रम /
तब टूट जाता है /
जब हलकी सी हलचल से/
कीचड़ ऊपर आजाता है |.

पत्थर को पूज्य बनाने में/
स्वयं का ही द्रष्टि कोण बदलना पड़ता है /
परन्तु अक्सर पत्थर /
अपने पत्थर होने का प्रमाण दे देता है |
.
अति निकटता वर्जनीय है/
किन्तु अति निकट आकर ही /
सत्य समझ में आता है और/
मनुष्य का झूठा भ्रम टूट जाता है |
निर्मल

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