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वंश चलते ही रहेंगे ....निर्मला सिंह गौर

Posted On: 1 Oct, 2014 Others में

भोर की प्रतीक्षा में ...कविताएँ एवं लेख

Nirmala Singh Gaur

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तितलियों के वंश सदियों तक यूँ ही चलते रहेंगे
पुष्प के सौन्दर्य का जब तक चमन पर राज होगा |
प्रेम के सुंदर सुमन हर सदन में खिलते रहेंगे
भावनाओं का अगर मन कक्ष में साम्राज्य होगा |
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ज्योत्सना अपनी रजत वर्षा सदा करती रहेगी
चन्द्रमा का जब तलक़ आकाश में अस्तित्व होगा |
झुण्ड सरिताओं का सागर पर समर्पित ही रहेगा
सिन्धु का जल पर चिरन्तन काल तक स्वामित्व होगा |
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वेदना के शूल मन को बेध कर घायल करेंगे
किन्तु फिर खुशियों के सुंदर रूप का विस्तार होगा |
आपदाओं की निशा घनघोर के पश्चात ही तो
तुष्टि के रवि का सुनहरी भोर में अवतार होगा |
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आस्था के पुष्प प्रतिमा पर सजे सिरमौर होंगे
धूप चन्दन से सुवासित गंधमय आकाश होगा |
अर्चना के थाल अक्षत कलश से सजते रहेंगे
देवि का ‘निर्मल’ ह्रदय में जब तलक़ आवास होगा |
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नृत्य ,गरबा ,डांडिया और निर्जला उपवास होंगे
शंख की ध्वनि से सनातन शब्द का आभास होगा |
एक निष्ठां ,सत्य ,संयम से ह्रदय निर्मल बनेगा
प्रेम के पल्लव खिलेंगे और फलित विश्वास होगा ||
…………………………………………………..निर्मल

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