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इस कोरोना की बदौलत मैंने जानी...

Posted On: 9 May, 2020 Others में

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शिशिर घाटपाण्डे

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इस कोरोना की बदौलत मैंने जानी
अन्न की अहमीयतता
जल की अमूल्यता
समय की दुष्करता
परिस्थितियों की विवशता

लड़ने की जीवटता

जीवन की गहनता

पैसे की महत्ता

स्वतन्त्रता की स्वच्छन्दता

स्वस्थता की अनिवार्यता

स्वच्छता की उपयोगिता

सुविधाओं की दुर्लभता

परिणामों की सकारात्मकता

दृढ़ निश्चय की सफ़लता

सद्कर्मों की अनुकरणीयता

कर्मशीलों की कर्मठता

कर्मों की प्राथमिकता

गुणों की विलक्षणता

विश्वास की ढृढ़ता

कार्यों की दक्षता

स्वयं की गोपनीयता

मनुष्य की मानसिकता

सन्तुष्टि की अनुमानता

संसाधनों की उपलब्धतता

ख़र्चों की मितव्ययिता

भविष्य की अकल्पनीयता

कल्पनाओं की भयावहता

विचारों की दूषितता

त्रासदी की भीषणता

आशंकाओं की वीभत्सता

संकट की आकस्मिकता

भोगियों की विलासिता

दुर्भावनाओं की संक्रमणता

दुर्जनों की दुर्जनता

क्रियाशीलों की निष्क्रीयता

ज़िम्मेदारों की अकर्मण्यता

शक्तिशालियों की उदासीनता

दिखावे की चातुर्यता

सम्पन्नों की हीनता

लाचारों की दीनता

जिज्ञासाओं की आतुरता

संभावनाओं की अपारता

आस्थाओं की मान्यता

आध्यात्म की दिव्यता

शक्ति की अदृश्यता

संस्कारों की पवित्रता

आत्मबल की तेजस्विता

प्रतिमाओं की सजीवता

संसार की भव्यता

निसर्ग की नैसर्गिकता

सृष्टि की रमणीयता

ब्रम्हाण्ड की सुन्दरता

वातावरण की सौम्यता

नद्यो की निर्मलता

झरनों की कलकलता

छवियों की मनोहारिता

उद्यानों की मोहकता

पुष्प की कोमलता

सुगंध की मादकता

पंछियों की चहचहता

राष्ट्र की सहिष्णुता

समाज की सहभागिता

समाज की सौहार्द्रता

जन-जन की उदारता

हृदय की सहृदयता

सेवाभावियों की महानता

प्राणियों की सहायता

सुख-दुःख की सहभागिता

परिजनों की निकटता

परिवार की सदस्यता

रिश्तों की आत्मीयता

और

इन सबसे भी बढ़कर,

मानव की मानवता ………

 

 

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे, मुम्बई
०९९२०४ ००११४/०९९८७७ ७००८०

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।

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