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जल संवर्धन, संरक्षण, संचयन

Posted On: 2 Jul, 2019 Politics में

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शिशिर घाटपाण्डे

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विगत १२-१२ सालों से आधा देश भयावह सूखे की भीषण मार झेल रहा है. देश भर में मानसून शुरू होने वाला है. बरसाती पानी को अधिक से अधिक या पूरी मात्रा में संचित/सुरक्षित करने हेतु युद्ध स्तर पर देश भर में योजना-परियोजनाएँ, प्रकल्प-अभियान तत्काल शुरू किये जाएँ. हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों, नदियों, तालाबों, जलाशयों को बाढ़ की त्रासदी से बचाने, जलसंचय संवर्द्धन/संरक्षण एवं वहाँ के पानी को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में घुमाव हेतु योजना-परियोजनाएँ, प्रकल्प-अभियान, जागरुकता अभियान चलाए जाएँ.

इसके अतिरिक्त कुछ अत्यन्त आवश्यक क़दम उठाए जाने बेहद ज़रूरी:

१. समुद्री जल को पेयजल में परिवर्तित, विकसित करने की इज़रायली तकनीक को यथाशीघ्र भारत में लाया जाए
२. कृत्रिम बादलों ☁ के निर्माण द्वारा वर्षा की चीन की तकनीक को यथाशीघ्र भारत में लाया जाए
३. देश के समस्त रहवासी क्षेत्रों में वर्षा के जल के संवर्द्धन, संचयन, संरक्षण हेतु युद्धस्तरीय अभियान चलाए जाएँ

श्रद्धेय अटलजी की “देश की समस्त नदियों के एकीकरण” की योजना साकार की जाए जिससे :

१. पेयजल, सिंचाई जल संकट सदा के लिये समाप्ति होगी
२. बाढ़ जैसी आपदा से सदा के लिये मुक्ति मिलेगी
३. विद्युत निर्माण को अत्यन्त बढ़ावा मिलेगा
४. खनिज, वन सम्पदा में अपार वृद्धि होगी
५. विशुद्ध पर्यावरण एवम् जलवायु की प्राप्ति होगी
६. पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा
७. रोज़गार एवं देश की आय के साधन–संसाधनों में बढ़ोतरी होगी

शिशिर घाटपाण्डे

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