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पिता

Posted On: 4 Mar, 2019 Others में

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gopalji54

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आखिर को सब भ्रम है या माया की चाह,

खोखली सी लगती है, सारे रिश्तों की परवाह,

मोल चुकाना पड़ता है या सब टूट जाता है,

सत्य है तो सिर्फ पिता का साया

पिता के बाद भी दूर तक जाता है,

 

बच्चे को सख्ती से

ज़िंदगी जीने का पाठ पढ़ाने वाले बाप के पास भी

पितृत्व की भावनाओं से भरा एक दिल होता है,

और चेहरे पर ओढ़ी हुई संजीदगी के पीछे

वो ज़ार ज़ार रोता है,

 

दिल का सुकूंन है

पिता के साथ का बल,

शाश्वत, अनवरत, नहीं कोई छल,

आपका मुकाम, आपकी शान,

आपका रुतबा, पूरे होते अरमान,

सबके पीछे एक पिता ने

अपना खुद खोया होता है,

सर झुकाइये उसके आगे

आपका आज

कल एक पिता ने

अपने पसीने से सींचा और

अपने अस्तित्व से बोया होता है,

 

“गोपालजी”

 

(सच है कि माँ बाप के अलावा हमें सारे रिश्तों का मोल चुकाना होता है या फिर वो टूट जाते है अन्य सारे रिश्ते सिर्फ स्वार्थ के लिये बनते हैं और स्वार्थ सिद्धि के पश्चात बिखर जाते हैं या सि़र्फ सामाजिक शिष्टाचारवश  निभाये जाते हैं )

 

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