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पदमावत !

Posted On: 24 Jan, 2018 Others में

युवामंचसत्यमेव जयते

Govind Bharatvanshi

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आदरणीय मित्रों ,…सादर प्रणाम !

महान भारतीय गाथा पदमावत का विवादित चलचित्र अंततः प्रदर्शित होने वाला है !………….नाम परिवर्तन और कई सुधारों के साथ सेंसर बोर्ड ने इसे प्रदर्शन की अनुमति दे दी है !………..उच्चतम न्यायालय तक सुनवाई के बावजूद फिल्म विरोधी अब भी अड़े हुए हैं !……….कई राज्य सरकारों के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है !…………कुछ शातिर महामूर्खों की साजिश ने शुचिता के समर्थकों को भी अंधविरोधी गुंडों में बदल दिया है !………..महान नारी सम्मान अब मूंछ की बदरंग सी लड़ाई बन गयी है !………सनातन बलिदानी क्षत्रिय समाज अब मूर्खतापूर्ण अहंकार की स्याह छाया में उद्दंडता पर आमादा दिखने लगा है !………सबको मूर्ख बनाने और कतिपय अराजकता जैसी स्थिति के लिए चलचित्र निर्माताओं को भी देश क्षमा नहीं करेगा !……….इस मामले में शुरू से ही रहस्यमयता छाई रही !…..लोभी प्रचार एक अंग हो सकता है ,…लेकिन ….राजनीतिक कुत्सितता इस मामले में भी प्रमुख हिस्सेदार है !………बांटकर चाटने में उस्ताद कान्ग्रेसियत इस कुत्सितता की मुख्यतम गुप्त खिलाड़ी है !….

इस समय जबकि हमारा भारत देश अपनी महानतम ऊँचाइयों की ओर पुनः अग्रसर है !……सबका साथ- सबका विकास चाहने वाली मजबूत श्रेष्ठतम सरकार भारत को मानवीय संसार का समर्थ विकास इंजन बनाने में जुटी है !…………दाओस में विश्व आर्थिक मंच से हमारे पूज्य प्रधानमंत्रीजी संसार को पवित्र वैश्विकता का प्रभावी पाठ पढ़ा रहे हैं !…………आतंकपरस्ती से संसार बेहाल है ,…….जन्मदात्री नारी की अस्मिता नित्य कुचली जाती है ,…..मानवीय मलिनता से प्रकृति भी परेशान है ……..विषम वैश्विक परिस्थितियों में भारतीयता के प्रति सनातन वैश्विक भरोसा पुनः जागृत हो रहा है ,…….ऐसे में भारतीय सत्ता के लिए बेचैन मूढ़ मलिन लोभी लोग अपने कुप्रयासों में जुटे हैं !………..ये नीच कुप्रयास सर्वथा निंदनीय हैं !…

हमारे समस्त क्षत्रिय समाज को पुनः क्षत्रियत्व समझना चाहिए ,…..मानवता की संकल्पित समुचित रक्षा क्षत्रित्व है !……..हमारे समस्त राष्ट्रभक्त सुरक्षाबल आधुनिक भारत के क्षत्रिय हैं !……..पवित्रतम बलिदानी गाथा पर मूर्खतापूर्ण हुडदंग हिंसा कदापि क्षत्रिय धर्म नहीं है !…….शातिर जयचंदों के नापाक इशारों पर अपनी एकता पर चोट पहुंचाना महान अपराध है ,……. ‘पदमावत’ चलचित्र देखने वालों ने उसे महान राजपूती गाथा की उत्तम अभिव्यक्ति बताया है !…….कुछ स्वार्थी अहंकारी तत्व पूँछ के बाल को मूंछ का सिद्ध करने पर आमादा दिखते हैं !………हमें अपनी सरकार सेंसर बोर्ड और न्यायतंत्र पर भरोसा रखना चाहिए !……..हमें अपने कलाकारों कलाप्रेमियों का समुचित सम्मान करना चाहिए !…….शैतानों की साजिश में फंसकर हम कई बार अपना अहित कर चुके हैं ,……फिर वही मूर्खता दोहरानी नीचता ही है !……..और यदि किसी रक्त में विरोध ही विरोध है तो,… वो निर्मम जघन्य बलात्कारों अपराधों के खिलाफ आमरण अनशन पर क्यों नहीं बैठता है !!!…….

……अंधविरोध अंधत्व से भी बहुत अधिक घातक होता है ,…..कान्ग्रेसियत की कुत्सितता में हमें कदापि नहीं फंसना चाहिए !…….वास्तविक अन्याय के खिलाफ युद्ध मानवता की अनिवार्यता है ,…लेकिन …..पदमावत सरीखी महान गाथाओं पर अकारण युद्धक भाव बनाना और बढ़ाना लोकतंत्र से महान अन्याय है !…………चंद मूर्खों के कारण राजपूताने की शान को कलंकित नहीं होना चाहिए !…… अब पदमावत विरोधी लोग मूर्ख ही लगते हैं !……..चलचित्र के निर्माता निर्देशकों को भी पर्याप्त नम्रता दिखाते हुए यथेष्ठ विद्वान जनों को शीघ्र संतुष्ट करना चाहिए !…….अंततः हमें अपने प्रयासों से संतुष्ट होना चाहिए !…….इस व्यापक विरोधी भाव से सरकार और सेंसरबोर्ड ने अवश्य ही विशेष सतर्कता अपनाई है !…..निर्माता निर्देशक ने भी शान्ति दिखाई है !………अब विरोध का कोई औचित्य नहीं लगता है ,…….हम अपने गौरवशाली क्षत्रिय समाज से पुनः पुनः विनम्रतापूर्वक शान्ति के लिए सादर निवेदन करते हैं !……शांति का फल सबके लिए सुखदायी होता है !…….क्षत्रियत्व का परिणाम पूर्ण शान्ति होता है !…हमें अपने गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूक और शिक्षार्थी भाव रखना चाहिए !…फिलहाल ……प्रत्येक मानव शांति से पदमावत देखने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए !……..महारानी पद्मावती भारतीयता का महान गौरव हैं !…..हमें प्रत्येक खांचे से ऊपर उठकर उनको सादर नमन प्रणाम करना चाहिए !….….ॐ शान्ति !………भारत माता की जय !!……..वन्देमातरम !!!

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