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युद्ध !

Posted On: 5 Aug, 2017 Others में

युवामंचसत्यमेव जयते

Govind Bharatvanshi

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आदरणीय मित्रों ,…सादर प्रणाम !

अपने अखबार के जरिये चीनी सत्ता ने भारत को पुनः गीदड़भभकी दी है !………..उन्होंने मोदी सरकार से भारतीय नागरिकों को सच बताने का हास्यास्पद आग्रह किया है !……..दुष्टता के चरम पर चढ़ी चीनी सत्ता ने भारत पर युद्धोन्माद फैलाने का घटिया आरोप लगाया है ,…..जबकि हड़पे तिब्बत की जमीन पर उन्मादी अभ्यास चीनी सेना ने किया ,……चीनी सत्ता सेना द्वारा संसार में भय फैलाने के अनेकों उपक्रम लगातार किये जाते हैं !……भारत भूटान चीन की संयुक्त सीमा विवाद पर हमारी सम्मानीय विदेशमंत्री आदरणीया सुषमा जी का संसद में दिया महत्वपूर्ण बयान अत्यंत स्वागत योग्य है ,…प्रत्येक विवाद का अंतिम समाधान आपसी संवाद ही है !…लेकिन …….कुत्सित आकांक्षाओं से ग्रस्त अहंकारी चीन का नंगा सच सभी जानते हैं ,….चोर चीन भारत की भीतरी परिस्थितियों को बिगाड़ने में भी जुटा है !……फिलहाल …. अखबारी आग्रह पर पुनः विचार करना मजेदार आवश्यकता लगता है !

पाकिस्तान, उत्तर कोरिया के सिवा चीन सभी पडोसी देशों पर अपना न्यूनाधिक अधिकार जताता है !…..ड्रैगन तिब्बत को निगल चुका है ,…लेकिन पचाने की औकात नहीं है !……… वह पापलिप्त पाकिस्तान उत्तर कोरिया को भी अपना गुप्त अंग ही समझता है ,…..सुविधानुसार उनपर कभी भी प्रत्यक्ष कब्ज़ा करने की स्पष्ट नीयत है !………चीनी सत्ता अपनी चिकनी चुपड़ी चालबाजियों से सांसारिक नियम व्यवस्था और महाशक्तियों को फुसलाने का दंभ भी पालता है !……अपनी अतिमहत्वाकांक्षी वैश्विक यातायात परियोजना के जरिये वह दुनिया पर अपना आर्थिक साम्राज्य स्थापित करना चाहता है !……..चीन फुसलाने बहकाने डराने में माहिर हो चुका है ,….लेकिन उसे ज्ञात होना चाहिए कि प्रत्येक अनैतिक कुचेष्टाओं का अंत भयानक पतन ही होता है !…… अहंकारी शक्तियां अक्सर अपनी कमजोरियों को नहीं पहचान पाती हैं ,…या नजरअंदाज करती हैं ,…….चीन के सन्दर्भ में भी ऐसा ही लगता है !

चीनी प्रतीक ड्रैगन है ,…वह देखने में भयानक सर्वहारी अपराजेय लगता है लेकिन वास्तव में वह कुछ भी नहीं है !….. कल्पनाओं में तो लोगबाग़ स्वर्ग के अधिपति भी बन जाते हैं ,……वास्तविकता में कैसरग्रस्त अनाथ कल्लू की दर्दनाक मौत मरते हैं !………वास्तविकताओं को पहचानते हुए चीनी बुद्धिमानों को अपने पैर अपनी चादर के भीतर समेटने चाहिए ,….और ,……तानाशाही छोड़कर लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अपनाने की ओर अग्रसर होना चाहिए !…….उसे महापीड़ित तिब्बत को तुरंत आजाद करना चाहिए !…….कब्ज़ा किये हुए भारतीय क्षेत्रों से फ़ौरन हटना चाहिए !……भूटान हांगकांग ताईवान मंगोलिया जापान आदि सभी देशों के भूभागों से अपनी कुदृष्टि हटानी चाहिए !……..पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर की आजादी में सहयोग देकर चीन पुनः भारत का प्रिय पडोसी बन सकता है !……..लेकिन यह सब करना मिथ्याचारी भ्रष्टाचारी कपटी चीनी सत्ता की औकात से बहुत बाहर लगता है !……

अब स्पष्ट लगता है कि संसार को मिलकर चीन, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया को प्रत्यक्ष/परोक्ष सैन्य शासन से मुक्त कराना होगा !……….ये दुष्टत्रयी मानवता के लिए अत्यंत हानिकारक है ,….कूटनीतिक विकल्पों की नाकामी से युद्ध ही एकमात्र विकल्प बचेगा !………….युद्ध सदैव पीड़ा देता है ,..लेकिन कभी कभी यह अनिवार्य आवश्यकता बन जाता है ,….जैसे कैंसरग्रस्त अस्तित्व को बचाने के लिए पीडादायक सर्जरी कीमोथेरेपी आवश्यक होती हैं !……..यह दुष्टत्रयी वर्तमान संसार की भयानक कैंसर है ,…इसका शीघ्र कारगर इलाज अत्यंत आवश्यक है !………..इनके गुप्त विषाणु बहुत जगह हो सकते हैं ,….उनको सरल इलाज से भी सुधारा मिटाया जा सकता है !…….ऊर्जा क्षमता समर्पण से ओतप्रोत संघर्षप्रेमी युवा भारतीय जनता अपनी वन्दनीय समर्थ सेना सरकार के पूर्ण समर्थन में कटिबद्ध है !………हम जानते हैं कि संसार जन्म जन्मान्तरों से चलता आया है ,…चलता रहेगा !……..हम प्रत्येक परिणाम के लिए तैयार हैं !………………..मेंढक बन्दर कुत्तों को खाने वालों में उनके जैसे उछलने कूदने भौकने के गुण अवश्य आयेंगे ,………हम किसी का अपमान नहीं करना चाहते लेकिन सत्य यही है ! …….चीनी गीदड़ भभकियों का हमपर तनिक भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला है !……..

अंततः चीन को अपने प्राचीन भारत यात्रियों के सहारे भारतीय जनता के मूल अमृतत्व को समझने का प्रयास अवश्य करना चाहिए ,…..उसे समझना चाहिए कि,.. क्यों एक भारतीय सैनिक दसियों चीनियों पर भारी है !…….दूषित स्वार्थ के कठोर खोल में कैद चीन को शुचितापूर्ण मैत्री के सुपरिणाम समझने चाहिए !…….युद्ध की स्थिति में प्राचीन चीन अपने अनाधिकारों के साथ अपने अस्तित्व से भी वंचित हो सकता है !……..पापों का परिणाम भयानक पतन ही होता है ,…अतः अमानवीय ड्रैगनी चीन में यदि तनिक भी समझदारी शेष है तो उसे मानवीय बनना ही चाहिए !…………अनाधिकारों को अतिशीघ्र छोड़कर समझदारी प्रदर्शित की जा सकती है !……समझदारी अपनाने से भगवत्ता और कृपालु होती है !…..संसार के प्रत्येक तत्व कण धातु उपधातु यंत्र ज्ञान विज्ञान शक्ति सामर्थ्य के मूल कारण कर्ता नियंता परमकृपालु परमपिता परमेश्वर ही हैं !…..सब उनसे ही हैं ,..उनके ही हैं ,…उनमें ही हैं !……….ॐ शान्ति !……भारत माता की जय !!…….वन्दे मातरम् !!!

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