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सोचें, क्या हम “ रमज़ान मुबारक “ कहने के हक़दार हैं?

Posted On: 16 Jul, 2015 Others में

SHAHENSHAH KI QALAM SE! शहंशाह की क़लम से!सच बात-हक़ के साथ! SACH BAAT-HAQ KE SAATH!

SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI

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दिनांक: 16.07.2015.

“अलविदा जुमा पर विशेष”
सोचें, क्या हम “ रमज़ान मुबारक “ कहने के हक़दार हैं?

रमज़ान के चन्द दिन ही बाक़ी हैं। “अलविदा जुमा” आ ही गया है। दिल चाहता है कि सोचें,क्या हम “ रमज़ान मुबारक “ कहने के हक़दार हैं?

दोस्तो, रमज़ान का चांद दिखते ही हर ईमानवाला ख़ुशी से झूम उठता है। क्योंकि यह इबादतों, बरकतों और रहमतों का महीना है। क़ुराने पाक के नुज़ूल का महीना है। इस माह में फिरदौस की ख़ुश्बू ज़मीन को महकाती है।
इस मुक़द्दस माह में ख़ुदावन्देआलम दरे-तौबा खोल देता है। ताकि गुनाहगारों और ख़ताकारों को पाक साफ ज़िन्दगी जीने का एक हसीन मौक़ा और मिल जाये। हमें दिल की गहराईयों में जाकर सोचना चाहिए कि क्या हम ह्क़ीक़त में इस मौक़े का फायदा उठा पाये हैं?

रमज़ान में दरे-तौबा खोलने का मक़सद, यह हरगिज़ नहीं है कि हम बाक़ी ग्यारह महीने अपने अज़ीज़ों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों के साथ आलमे-इंसानियत और इस दुनिया को तकलीफ पहुंचाते रहे। सिर्फ एक माह इबादत और तौबा कर जन्नत पाने के तमन्नाई हो जायें।

दरे-तौबा खोलने का मक़सद यह है कि जो ग़लती जाने-अनजाने में हमसे एक बार हो गई है, तौबा करने के बाद दोबारा न हो।

इरशाद हुआ है,” किसी की मदद करते वक़्त उसकी आंखों में ना देख़ना। हो सकता है कि उसकी आंखों में मौजूद शर्मिन्दगी तुम्हारे दिल में ग़ुरूर पैदा करदे और तुम गुनाहगार हो जाओ। क्योंकि ग़ुरूर और तकब्बुर अल्लाह-तआला को हरगिज़-2 पसन्द नहीं।”

अपने कलमागो भाई – बहनों से हमारी दस्तबस्ता गुज़ारिश है,” पहले ईमानदारी से रोज़े रखें, इबादत करें। ज़रूरतमन्दों, ग़रीबों की मदद करें। उन्हें रोज़ा अफ्तार करायें न कि सियासतदानों और रसूख़दारों को। अपनी सभी दीनी और दुनियावी ज़िम्मेदारियों को पूरा करें। रोज़े का बहाना लेकर उनमें कोताही न बरतें। फिर गुनाहों की दिल से तौबा करें। मुस्तक़बिल में इन गुनाहों और ग़लतियों को न दोहरायें।

“तब कहें-रमज़ान मुबारक/ ईद मुबारक”

इससे न सिर्फ आपका भला होगा बल्कि आपके ख़ानदान, मोहल्ले, शहर, सूबे और मुल्क के साथ दुनिया का भी भला हो सकेगा। यह ज़मीन ह्क़ीक़त में अमन, इंसानियत, भाई चारगी और मोहब्बत का गहवारा बन जायेगी।

आईये आज से ही शुरूआत करते हैं फिर कहेंग़े, रमज़ान / ईद तहेदिल से मुबारक, तहेदिल से मुबारक – मुबारक मुबारक!

-सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी
वरिष्ठ समाजवादी चिंतक
निवास-“काशाना-ए-हैदर” 291-लक्ष्मन गंज – झांसी (उ0प्र0)-284002. मो.न. 09415943454
SHAHENSHAH HAIDER 20.05.15Allah -o- akbar Ramzan

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