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अहिंसा और हिन्दुस्तान, फ़ायदा उठाएं चीन पाकिस्तान !

Posted On: 6 Nov, 2017 Others में

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harirawat

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माउन्टवेटन के कहने से देश के दो हिस्से हुए, हिन्दुस्तान वनाम पाकिस्तान !
सबसे बड़ी गलती थी ! बंटवारे से पहले आम नागरिक की सुरक्षा का पूरा इंतजाम करना था,
लेकिन नेताओं ने सुरक्षा की अनदेखी जिसका नतीजा बड़ी संख्या में पाकिस्तानी हिंदुओं को
भुगतना पड़ा, पाकिस्तान से कट कट कर हिन्दुओं के शव गाडी से भर भर कर भारत आ
रहे थे, इधर सन्यासी लोग अहिंसा के पुजारी, किसी
भी मुसलमान को पाकिस्तान नहीं भेजना चाहते थे, “अहिंसा परमो धर्मा, हम धर्म निरपेक्ष हैं ” !
जब पाकिस्तान मुसलमानों के लिए और हिन्दुस्तान हिन्दुओं के लिए बंटवारा किया गया था
तो सभी मुसलमान पाकिस्तान क्यों नहीं भेजे गए ? कांग्रेस इसका जबाब आज तक नहीं दे पायी !
बहुत सारे मुसलमा पाकिस्तान नहीं गए और उसका खमियाजा आज देश भुगत रहा है, राजनीति की चालों से,
बढ़ती हुई जनसख्या, दुश्मन देश में रिश्तेदारी है !
काश्मीर में १९४८ में भारतीय फ़ौज जीत के कगार पर थी, लेकिन प्रधान मंत्री ने
जबरन बीच में ही सीज फायर करवा दिया था, नतीजा बीच काश्मीर के अंदर पाक
अकुपायड काश्मीर बनवा दिया गया ,
जो आज सबसे बड़ा जहरीला काँटा बन चूका है !
साथ ही सेना की संख्या भी कम करदी गयी,
पुराने हथियार जंक लगे हुए बची हुई सेना के पास थे ! कांग्रेस का कहना था,
“हम शांति पसंद लोग हैं, हमारा कोई शत्रु नहीं है, और
चीन ने हिन्दुस्तान की इसी कमजोरी का लाभ उठाया और १९६२ “हिन्दू चीनी भाई”
का नारा लगाते हुए हिन्दुस्तानी पोस्टों पर अटेक कर दिया, हर पोस्ट पर एक प्लाटून की
संख्या के बराबर सैनिक थे वे भी पुराने हथियारों के साथ ! फिर जो
हुआ वह पूरे भारत को पता है ! सेना के वीर जवान हथियारों और एम्युनिशन की कमी के
कारण चीन बड़ी सैन्य शक्ति और नए हथियारों का सामना ज्यादा देर तक नहीं कर सकी !
काफी पोस्टों पर चीनियों ने कब्जा कर दिया और निहत्थे जवानों को मार दिया ! सीज
फायर होते होते तक चीन सीमा रेखा के बहुत अंदर आचुका था ! दुश्मन ने वे पोस्ट हमें
लौटाए नहीं और हमने लेने की चेष्टा भी नहीं की,, आपसी वार्ता होती रही, नतीजा वही धाक के तीन पात !

मुजीबुर्रहमान ने पाकिस्तान से, बँगला देश की मुक्ति के लिए भारत से मदद मांगी !
तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंद्रा जी ने सेना भेजी, लेकिन मुक्तिवाहिनी बना कर !
यद्द्पि बँगला देश में भी कुछ कट्टरपंथी भारत से दूरी बनाने की वकालत करते हैं, फिर भी
भारत-बँगला देश के आपसी सम्बन्ध मित्रता पूर्ण हैं ! चीन के होम मेड सामानकी बिक्री
का सबसे बड़ा बाजार भारत है, करीब अरबों का लेनदेन होता है, चीन की अर्थ व्यवस्था
का कम से कम ३० से ४० प्रतिशत का टर्नओवर भारत से जाता है ! फिर भी वह
पाकिस्ता द्वारा पोषित आतंकवादियों को छत्र छाया देकर भारत से फिर से दुश्मनी बढ़ा रहा है !
सुरक्षा परिषद् में अमेरिकका, ब्रिटैन, फ़्रांस और रूस के प्रस्ताव को वीटो करके पाकिस्तानी
आतंकवादी को खुलम खुला संरक्षण दे रहा है ! मतलब भारत के पूरब और पश्चिम दिशाओं में
दो दुश्मन हैं ! अमेरिका के बाजार भी चीनी सामान से भरे पड़े हैं, अगर ये दोनों देश चीनी सामान का
वहिष्कार कर दें, जो की अब बिना बिलम्ब किये कर ही देना चाहिए, तो चीन की अर्थ व्यवस्था की
आधी कमर टूट जाएगी !
अब देश की सुरक्षा पर भी विचार कर लेते हैं, जम्मू काश्मीर की पुलिस से एक सिपाही राईफल
और एम्युनिशन लेकर आतंकियों से जा मिला है, पुलिस में रहते हुए जितनी ट्रेनिंग ली, सुरक्षा से सम्बन्ध
रखने वाले सारी जगहों का पूरा नक्शा बनाकर भागा था ये आतंकी, अब उसी का लाभ उठाकर पुलिस
और सीमा सुरक्षा दल पर रात के अँधेरे में अचानक अटेक कर रहे हैं ये गद्दार, भगोड़े ! अगर देश के क़ानून
शक्त हों, और गद्दारों हत्यारों, आतंकवादियों को फांसी का प्रावधान हो तो जम्मू काश्मीर और देश के पूरबी राज्यों
में शांति बहाल हो जाय, डर के आगे भूत भी भागता है !! कही बार देश के अंदर देश की मिटटी में पैदा हुए,
इसी मिट्टी में बड़े हुए ! आज उसी धरती मां से, जिसने खिलाया पिलाया, सिखाया, गद्दारी कर रहे हैं आतंकियों से
हाथ मिलाकर ! कुछ राजनीति में घुसे हुए हैं और भर पूर कुर्सी का लाभ उठाते हुए, दुश्मनों से पतंग जोड़ रहे हैं !
समय रहते इन आतंकवादियों, गद्दारों, को नहीं समाप्त किया गया तो देश बचाना भारी पडेगा ! भारत माता की जय !
बन्दे मातरम !

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