blogid : 12455 postid : 1389105

भ्रष्टों की बारात

Posted On: 9 Jan, 2019 में

jagate rahoJust another weblog

harirawat

457 Posts

1015 Comments

वो देखो बैठा सोने के पहाड़ पर,
सारी है हराम खोरी की,
रग रग में दूषित रक्त भरा है,
किसान मजदूरों से चोरी की,
अब सता से दूर हुआ,
रक्त पीने को मिला नहीं,
कहीं से कुछ मिल जाय, भटक रहा है यहाँ कहीं !
पुरुखों ने विरासत में दी थी हेरा फेरी घोटाला,
गाली गलौज, अहंकार और वे वजह का रोला !
पर्ची लिखवा कर भाषण देता,
क्या कहा उसे खुद समझ न आता !
पर है कमाल का ड्रामेवाज़,
कल क्या था कोई नहीं जानता,
पर अस्थाई हिन्दू बना है आज !
सभ्य, संस्कृति का भान नहीं है,
जवां पे वरिष्ट्रों का मान नहीं है,
खुद शर्ट चोरी की है पहने,
दूसरों को चोर बताता है,
पूरा परिवार घोटालों में इसको शर्म नहीं आता है !
संभल के रहना देश वासियो,
इन जहरीले नागों से,
अंदर ही अंदर सुलग रहे, इन छिपे हुये अंगारों से !

मैं राह भटक गया हूँ,
मुझको मेरी मंजिल बतादो, चलते चलते,

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग